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खगोल विज्ञान अनुसंधान में नए कदम देंगे भारत को नई पहचान

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विज्ञान, प्रौद्योगिकी और खासकर खगोल विज्ञान की बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने बजट 2026-27 में कुछ अहम प्रावधान किए हैं। इस साल के बजट में खगोल विज्ञान अनुसंधान को नई ऊँचाई देने का फैसला लिया गया है। इसके तहत चार बड़ी घोषणाएं की गई हैं।

पहला है National Large Solar Telescope यानी NLST, जिसकी मदद से वैज्ञानिक सूरज की गतिविधियों का और बारीकी से अध्ययन कर पाएंगे। इससे यह समझना आसान होगा कि सूरज से निकलने वाली ऊर्जा और तूफान, सैटेलाइट, मोबाइल नेटवर्क और संचार व्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं। यह एक तरह से भारत के आदित्य L-1 मिशन के पूरक का काम करेगा।

दूसरा है National Large Optical Infrared Telescope यानी NLOT जो बहुत दूर मौजूद तारों और आकाशगंगाओं को देखने में मददगार होगा। यह टेलीस्कोप हमें ब्रह्मांड के रहस्यों के और करीब ले जाएगा।

इसके साथ ही लद्दाख में स्थित Himalayan Chandra Telescope को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने की योजना भी रखी गई है। जिससे खगोलवैज्ञानिकों का अवलोकन और अध्ययन पहले से ज्यादा साफ़ और सटीक होगा।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश में COSMOS-2 Planetarium के निर्माण की घोषणा भी की गई। जहां उन्नत डिजिटल डिस्प्ले, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों और दूसरी सुविधाओं के ज़रिए सितारों, ग्रहों और अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारियों को आसान तरीके से समझाया जाएगा।

इसका उद्देश्य है खगोल विज्ञान के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना, और यह मैसूरु में विकसित की जा रही COSMOS-1 सुविधा का पूरक होगा।

इन सभी योजनाओं का उद्देश्य भारत की अवलोकन क्षमताओं का विस्तार करना, अत्याधुनिक अनुसंधान को समर्थन देना, वैश्विक सुविधाओं पर अपनी निर्भरता कम करना और वैज्ञानिकों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करना है।

इन सुविधाओं से भारत न सिर्फ अपने वैज्ञानिक ज्ञान को मज़बूत करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान और भूमिका को और प्रभावशाली बनाएगा।

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