
शुक्र ग्रह को यूं तो पृथ्वी का जुड़वां कहा जाता है, परंतु इस ग्रह का वातावरण बिल्कुल अलग है।
अत्यधिक तापमान और दबाव के साथ, यह ग्रह कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड से बने, घने और अपारदर्शी वायुमंडल से ढका हुआ है, जो दिखने वाले प्रकाश को पूरी तरह से रोक देता है।
इसी वजह से शुक्र ग्रह की सतह का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक रडार तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जो रेडियो तरंगों का उपयोग करके घने बादलों के आर-पार जा सकती है और सतह की विस्तृत मैपिंग कर सकती है।
1990 से 1992 के दौरान नासा के मैगेलन अंतरिक्ष यान ने रडार तकनीक से ही शुक्र ग्रह का नक्शा बनाया था।
हाल ही में इटली की University of Trento के वैज्ञानिकों ने उसी पुराने रडार डेटा का दोबारा गहराई से अध्ययन किया, और उन्हें निक्स मॉन्स (Nyx Mons) नामक इलाके में एक विशाल अंडरग्राउंड नाली का पता चला। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एक लावा ट्यूब है।
दरअसल, जब ज्वालामुखी से लावा बाहर निकलता है तो वह ज़मीन पर बहता है। कुछ समय बाद लावा की ऊपरी परत तो ठंडी होकर सख्त हो जाती है, लेकिन अंदर का लावा बहता रहता है जिससे एक सुरंग नुमा आकार बन जाता है। इसे ही लावा ट्यूब कहा जाता है।
रिसर्च के अनुसार, शुक्र पर मिली यह सुरंग लगभग 1 किलोमीटर चौड़ी है। इसकी छत की मोटाई कम से कम 150 मीटर है और इसके अंदर का खाली हिस्सा 375 मीटर गहरा है।
यह खोज बताती है, कि शुक्र ग्रह के अंदर भी ज्वालामुखी गतिविधियां हुई हैं, और आने वाले समय में इनविज़न और वेरिटास जैसे मिशन इस ग्रह के बारे में और भी रहस्य उजागर कर सकते हैं।

