Factories और कारखानों से निकले पानी में, methylene blue और congo red जैसे हानिकारक रंग पाए जाते हैं, जो नदियों, झीलों और तालाबों के पानी में मिलकर न केवल पानी का रंग बदलते हैं बल्कि पर्यावरण के साथ-साथ हमारे स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते हैं, जिससे सांस की बीमारी, त्वचा रोग जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
मगर अब इस समस्या का समाधान मोहाली के Institute of Nanoscience and Technology के वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है। उन्होंने एक अनोखा 3D-printed filter तैयार किया है, जो biodegradable plastic से बना है।
शोधकर्ताओं ने इस वॉटर फ़िल्टर में Bismuth Ferrite की कोटिंग की है, जो सूरज की रोशनी और vibration से सक्रिय होकर पानी में मौजूद हानिकारक रसायनों को तोड़ता है। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को और सफल बनाने के लिए artificial intelligence का सहारा लिया जिससे ये सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि ये system अलग-अलग परिस्थितियों में भी अच्छी तरह काम कर सके।
इस सिस्टम की सबसे खास बात ये है कि ये पूरी तरह से biodegradable होने के साथ-साथ किफायती और दुबारा इस्तेमाल के लायक भी है। साथ ही यह फिल्टर 98.9% congo red और 74.3% methylene blue को हटाने में सक्षम है।

