
Kidney failure आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। हर साल लाखों मरीज़ नई किडनी का इंतज़ार करते हैं, लेकिन ब्लड ग्रुप न मिलने के कारण कई लोगों की ज़िंदगी इसी इंतज़ार में खत्म हो जाती है। डायलिसिस पर जीना महंगा साबित होता है और ट्रांसप्लांट की उम्मीद सिर्फ तभी बनती है जब डोनर का ब्लड ग्रुप मरीज़ से मेल खाए।
लेकिन अब Canada की University of British Columbia (UBC) के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान खोज लिया है। उन्होंने ऐसी यूनिवर्सल किडनी बनाई है, जो किसी भी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति में लग सकती है।
इस तकनीक में वैज्ञानिकों ने दो एंज़ाइम — FpGalNAc deacetylase और FpGalactosaminidase का इस्तेमाल किया, जो किडनी की सतह पर मौजूद ब्लड ग्रुप बताने वाले A-टाइप एंटीजन को हटा देते हैं। जब ये एंटीजन हट जाते हैं, तो किडनी O ब्लड ग्रुप जैसी बन जाती है और एक universal donor की तरह काम करती है।
फिलहाल यह तकनीक अपने शुरुआती चरण में है लेकिन शोधकर्ताओं को यह उम्मीद है कि अगर यह तकनीक आगे भी सफल साबित होती है, तो किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अब ब्लड ग्रुप का मेल ज़रूरी नहीं रहेगा। इससे ट्रांसप्लांट वेटिंग लिस्ट घटेगी और हज़ारों लोगों को जल्दी किडनी मिल सकेगी।

