
पुणे स्थित National Centre for Radio Astrophysics -TIFR के वैज्ञानिकों ने, जेम्स वेब्ब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के डेटा का उपयोग करते हुए, एक ऐसी विशाल स्पाइरल गैलेक्सी खोजी है जो हमसे 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर है। जिसका मतलब है कि यह तब भी अस्तित्व में थी जब ब्रह्मांड की उम्र केवल 1.5 अरब वर्ष थी, जबकि अब ब्रह्मांड की उम्र 13.8 अरब वर्ष समझी जाती है। लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष चौड़ी इस आकाशगंगा का नाम भारतीय खगोल शास्त्रियों ने अलकनंदा रखा है।
खगोल शास्त्रियों के अनुसार आश्चर्य की बात यह है कि ब्रह्मांड की शुरुआत में बनी यह गैलेक्सी न सिर्फ बड़ी और जटिल है, बल्कि इसमें तारा निर्माण दर हमारी मिल्की वे गैलेक्सी से 20 से 30 गुना अधिक है। यह खोज ब्रह्मांड से जुड़ी हमारी समझ को बदलने वाली है, क्योंकि अब तक की समझ के अनुसार, ब्रह्मांड की शुरुआत में बनने वाली गैलक्सीज़ ज्यादातर छोटी, कमज़ोर और बिखरी हुईं थीं.., इसके उल्ट अलकनंदा बहुत ही अच्छी तरह से बनी हुई सर्पिल भुजाओं वाली विशाल गैलेक्सी है और इसमें सूर्य जैसे लगभग 10 अरब तारे हैं।
यह खोज बताती है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड हमारी अपेक्षा से कहीं अधिक तेज़ी से आकाशगंगाओं का निर्माण करने में सक्षम था। फिलहाल वैज्ञानिक अलकनंदा की उत्पत्ति को और गहराई से समझने के लिए शोध कर रहे हैं।

