
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सिर्फ़ मनुष्यों ही नहीं बल्कि पेड़ पौधों और जानवरों सब पर पड़ रहा है । यही वजह है जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनियाभर में रिसर्च की जा रही हैं ताकि इसके उचित वैज्ञानिक हल निकाले जा सकें। हाल के वर्षों में ऐसा ही एक अध्ययन ध्रुवीय भालू यानी पोलर बियर्स पर हुआ है, वैज्ञानिकों ने पाया, जलवायु परिवर्तन की वज़ह से पोलर बियर सूक्ष्म आनुवंशिक परिवर्तनों से गुजर रहे हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्ट एंग्लिया (UEA) के शोधकर्ताओं द्वारा दक्षिण-पूर्वी ग्रीनलैंड में रहने वाले ध्रुवीय भालुओं पर किए गए इस अध्ययन में बढ़ते तापमान और भालूओं की DNA गतिविधि में बदलाव के बीच एक साफ़ संबंध पाया गया है ।
ध्रुवीय भालू कैसे रिस्पॉन्ड कर रहे हैं, यह समझने के लिए शोधकर्ताओं ने 17 बड़े पोलर भालुओं के ब्लड सैंपल्स को Analyse किया। उनमें से 12 नॉर्थ-ईस्ट से और पांच साउथ-ईस्ट से थे । शोध ने “जंपिंग जीन्स” पर फ़ोकस किया।
पता चला कि बढ़ता टेम्परेचर साउथ-ईस्टर्न ग्रीनलैंड भालुओं के DNA में जंपिंग जीन्स की गतिविधि में काफ़ी बढ़ोतरी करता है जिससे उसके व्यवहार और Metabolism में बदलाव आ रहा है ।
ये निष्कर्ष एसे वक्त में सामने आए हैं, जब 2050 तक दो-तिहाई से अधिक ध्रुवीय भालू विलुप्त होने की आशंका ज़ाहिर की जा रही है ।
शोध कर्ताओं के मुताबिक़ जैसे बाकी प्रजातियां खत्म होने का सामना कर रही हैं, ये खास भालू इस बात का जेनेटिक ब्लूप्रिंट दे रहे हैं कि ये क्लाइमेट चेंज के हिसाब से अपने आपको कैसे अडॉप्ट कर सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पोलर बियर के खत्म होने का खतरा कम हो गया है। हमें अभी भी दुनिया भर में कार्बन एमिशन कम करने और तापमान बढ़ने की रफ़्तार को धीमा करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी होगी ।

