fbpx
News Research

IIT Roorkee के नवाचार से बैक्टीरिया करेंगे पानी की सफ़ाई

 

Nanophosphate particles

हमारी लापरवाही से जल स्रोतों में प्लास्टिक पॉल्यूशन‌ लगातार बढ़ रहा है, और इससे पानी धीरे-धीरे ज़हरीला बन रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, प्लास्टिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले थैलेट्स (Phthalates), जिनका प्रयोग प्लास्टिक को लचीला और मज़बूत बनाने के लिए किया जाता है, यह पानी में लंबे समय तक बने रहते हैं। और ये यौगिक हमारी Hormonal प्रणाली, Reproductive health, और metabolism के लिए हानिकारक हैं।

हालांकि कुछ बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से इन यौगिकों को विघटित कर सकते हैं, लेकिन वास्तविक दुनिया में सफाई के प्रयास अक्सर धीमे होते हैं, क्योंकि दूषित जल में अक्सर सूक्ष्मजीवों के विकास और चयापचय

गतिविधि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है। और अगर पारंपरिक उर्वरक जैसे पोषक तत्व मिलाए जाएं तो सुपोषण से शैवाल जैसे जीवों की वृद्धि होने से जल की गुणवत्ता और भी ख़राब हो जाती है।

इस चुनौती को हल करने के लिए IIT रुड़की के शोधकर्ताओं ने बहुपोषी नैनोफॉस्फेट कणों को डिज़ाइन किया है, जो सूक्ष्म पोषक तत्वों के भंडार के रूप में कार्य करते हैं। ये कण धीरे-धीरे आवश्यक पोषक तत्वों-जैसे फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, कैल्शियम और सूक्ष्म धातुओं को ठीक उसी स्थान और समय पर छोड़ते हैं, जब बैक्टीरिया को उनकी ज़रूरत होती है।

वैज्ञानिकों ने जब इन नैनोफॉस्फेट पार्टिकल्स (Nanophosphate particles) को खास बैक्टीरिया रोडोकोकस जोस्टीआई आरएचए1 (Rhodococcus jostii RHA1) के साथ मिलाया, तो देखा की सिर्फ तीन घंटे के अंदर पानी से लगभग सभी थैलेट्स (Phthalates) खत्म हो गए। बैक्टीरिया तुरंत सक्रिय हुए और नैनोफॉस्फेट पार्टिकल्स  से धीरे-धीरे पोषक तत्व लेते हुए लगातार ऊर्जा प्राप्त करते रहे। किसी और पोषक की ज़रूरत नहीं पड़ी।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह विधि नल के पानी, नदी के पानी और कृत्रिम अपशिष्ट जल सहित कई नमूनों में कारगर साबित हुई। सभी मामलों में, पानी की रासायनिक संरचना में अंतर के बावजूद, बैक्टीरिया ने उच्च सक्रियता बनाए रखी और थैलेट्स को कुशलतापूर्वक विघटित किया।

शोधकर्ताओं का कहना है, कि यह तरीका सस्ता, सुरक्षित और भरोसेमंद वैज्ञानिक समाधान प्रदान कर सकता है। थोड़ी सी मात्रा में ये नैनो पार्टिकल्स डालकर सही बैक्टीरिया को सक्रिय किया जा सकता है। जिससे खर्च कम होगा.., प्रदूषण नहीं फैलेगा..और पानी की सफ़ाई तेज़ होगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like