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धूल के साथ हिमालय तक पहुंच रहे हैं वायुजनित रोगाणु

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के स्वायत्त संस्थान बोस इंस्टीट्यूट ने अपने 2 वर्षों के अध्ययन से यह पता लगाया है कि पश्चिमी भारत से उठने वाले धूल के तूफान हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं, और अपने साथ वायुजनित रोगाणु (airborne pathogens) भी ले जाते हैं।

हिमालय की उचाईयों पर ठंड ज्यादा होती है और हवा में ऑक्सीजन कम होता है, इसलिए बीमारियों का ख़तरा अपने आप बढ़ जाता है। परंतु इन ऊंचाइयों पर वायुजनित रोगाणुओं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के परिणामों को जोड़ने के वैज्ञानिक प्रमाण अभी तक सीमित रहे हैं।

साथ ही अंतरराष्ट्रीय धूल परिवहन के सूक्ष्मजीव विज्ञान संबंधी पहलू को भी अभी कम समझा गया है। इसी समझ को बेहतर करने के लिए बोस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पश्चिमी भारत के सूखे क्षेत्रों से उठने वाले धूल के तूफानों की दो वर्षों तक निरंतर निगरानी की।

उन्होंने पाया कि शक्तिशाली धूल के तूफान, घनी आबादी वाले और प्रदूषित गंगा के मैदानों को पार करते हुए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं…, अंततः हिमालय की पहाड़ी ऊंचाइयों पर जमा होते हैं।

अपने साथ ये ऐसे वायुजनित रोगाणुओं को भी ले जाते हैं जिनसे श्वसन और त्वचा संबंधी बीमारियां होती हैं। इसके अलावा,  स्थानीय स्तर पर उत्पन्न रोगाणु ऊंचाइयों तक पहुंचकर दूर-दराज़ से आने वाले रोगाणुओं के साथ मिल जाते हैं, जिससे पेट संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं। यानी ये रोगाणु हिमालय की वायुमंडल में जीवाणुओं की संरचना को बदल देते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट’ पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन यह समझने में सहायक है कि हिमालय के वायुमंडल में जीवाणुओं की संरचना कैसे परिवर्तित हो रही है। यह शोध सरकार के लिए भी ज़रूरी है। इससे अच्छी स्वास्थ्य योजनाएँ बनाने  और बीमारियों का पहले से पता लगाने वाली व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी।

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