अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने इस बात से पर्दा उठाया है कि सांप हफ्तों-महीनों तक, बिना खाए कैसे रह सकते हैं…
Open Biology जर्नल में छपे इस दल के अध्ययन से पता चला कि साँपों में ग्रेलिन (Ghrelin) नामक जीन नहीं होता, जिसे Hunger Hormone या भूख के हार्मोन की जीन भी कहा जाता है।
यही हार्मोन हमें खाने का समय बताता है। पर इसके अभाव में सांपों को भूख का पता ही नहीं चलता और वे लंबे समय तक बिना कुछ खाए रह सकते हैं।
इस शोध के लिए 112 तरह के सरीसृपों (reptiles) जैसे साँप, कछुए और मगरमच्छ के जीनोम का अध्ययन किया गया। Sequence Comparison और Gene-loss Detection जैसे tools का इस्तेमाल करके वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि सभी तरह के साँपों, जैसे अजगर, बोआ और वाइपर में ग्रेलिन जीन तथा इसको सक्रिय करने वाली एंज़ाइम MBOAT4, या तो खत्म हो चुकी है, या अत्यधिक कमज़ोर हो गई है। और यही स्थिति गिरगिट और एक तरह की छिपकली में भी दिखी।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कोई ग़लती नहीं बल्कि इन जानवरों की भोजन संबंधी आदतों के अनुकूलन का परिणाम हो सकता है।
जैसे सांप और गिरगिट, भोजन की सक्रिय रूप से तलाश करने की बजाय, घात लगाकर शिकार करने की रणनीति अपनाते हैं। और ऐसा हफ्तों या महीनों तक चल सकता है। ऐसे में लगातार भूख का संकेत देने वाला हार्मोन प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। इसलिए ग्रेलिन प्रणाली सांपों में लुप्त हो गई।
इसके अलावा ग्रेलिन सामान्यतः शरीर को उपवास के दौरान ईंधन के रूप में वसा जलाने का संकेत देता है। परंतु ग्रेलिन के अभाव में, सांपों को अपनी ऊर्जा-खपत को यथासंभव कम रखने में मदद मिलती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इन जानवरों द्वारा अत्यधिक उपवास और ऊर्जा स्तर में बदलाव को संभालने के तरीके का अध्ययन करने से, इंसानों में मेटाबॉलिक समस्याओं को समझने और उनके इलाज खोजने में मदद मिल सकती है।

