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टेल्यूरियम नैनोशीट्स से सस्ता होगा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन

 

आज के समय में मोबाईल, टीवी, और कंप्युटर जैसे और भी उपकरण छोटे होते जा रहे हैं, और यही वजह है की वैज्ञानिक अब चिंता में पड़ गए हैं, क्योंकि उनके सामने एक बड़ी समस्या यह है की अब ऐसा पदार्थ ढूँडना या बनाना होगा जो आकार मे छोटा और मजबूत होने के साथ-साथ अच्छी तरह से काम कर सके।

हाल ही इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों की टीम ने एक नया पदार्थ तैयार किया है। जिसे क्वासी 2डी टेल्यूरियम (Te) नैनोशीट्स कहा जाता है।

वैज्ञानिकों ने जब टेल्यूरियम को पतली नैनोशीट्स में बदला तो देखा कि उसकी सतह पर कुछ electrons के spin दिखाई दिए। जो Ferromagnetic यानी चुंबक की तरह काम कर रहे थे।

यही चुंबक पानी से हाइड्रोजन गैस को बनाने मे मदद करता है। इससे हाइड्रोजन उत्पादन के लिए वोल्टेज कम हो जाता है और बिजली भी कम लगती है।

इस नई तकनीक से आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन सस्ता हो सकता है। इसलिए इस तकनीक से आने वाले समय में कम ऊर्जा वाले मेमोरी डिवाइस, स्मार्ट सेंसर और पानी से हाइड्रोजन बनाने वाली मशीनें तैयार की जा सकती हैं।

इस शोध को Advanced Materials पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये नैनोशीट्स मजबूत और लचीली हैं, इसलिए इन्हें पोर्टेबल और वियरेबल तकनीकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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