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DEHP के संपर्क से बच्चों में एंग्ज़ायटी का ख़तरा

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एक नए अध्ययन में चूहों पर किए गए प्रयोगों से पता चला है कि गर्भावस्था और जीवन के शुरुआती दिनों में, DEHP के संपर्क में आने का असर, लंबे समय तक बना रह सकता है।

DEHP (Di-(2-ethylhexyl) phthalate) का इस्तेमाल प्लास्टिक को मुलायम और लचीला बनाने के लिए किया जाता है। यह रसायन खिलौनों, मेडिकल उपकरणों, रेनकोट, शावर कर्टेन और प्लास्टिक की कई चीज़ों में पाया जाता है। परंतु यह रसायन एक एंडोक्राइन डिसरप्टर है। यानी यह हमारे शरीर की (हार्मोनल) प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकता है।

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने देखा कि जिन नर चूहों को गर्भ में रहते हुए और जन्म के शुरुआती दिनों में DEHP के संपर्क में लाया गया, वो चूहे खुली जगहों पर जाने में हिचकिचाते थे और  लंबे समय तक एक ही जगह पर जमे रहते थे; जो कि चूहों में एंग्जायटी के आम लक्षण माने जाते हैं। और यह असर संपर्क खत्म होने के काफ़ी समय बाद भी बना रहा था।

हालांकि, यह अध्ययन चूहों पर किया गया है परंतु यह बहुत हद तक मुमकिन है कि ऐसे संपर्क से इंसानी बच्चे भी उम्र भर के लिए प्रभावित होते हों। यानी केवल जन्म से पहले और जन्म के शुरुआती दिनों में DEHP के संपर्क में आने से शिशुओं की हार्मोनल प्रणाली प्रभावित हो सकती है। और इसका दुष्प्रभाव, आगे चलकर बच्चों में डर, चिंता और तनाव जैसी मानसिक समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है।

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि जिन नर चूहों को GABA (gamma-aminobutyric acid) या Testosterone दिया गया, उनमें डर और चिंता से जुड़ा व्यवहार पहले की तुलना में कम हो गया। यानी इन दुष्प्रभावों को कम करने के प्रयास भी वैज्ञानिकों द्वारा जारी हैं।

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