
वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने, फ़्लैश-फ़्रोज़न सैंपल और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का इस्तेमाल करके, पहली बार हमारे रेटिना में पाए जाने वाले Cone Opsins (ऑप्सिन्स) के atomic structure को समझा है।
रेटिना की कोन कोशिकाओं में पाए जाने वाले यह विशेष प्रोटीन हमें दिन के उजाले में देखने में मदद करते हैं और हमारी रंगीन दृष्टि का आधार हैं। इनके तीन प्रकार होते हैं (L,M,S) और हर प्रकार प्रकाश की अलग वेवलेंथ के प्रति संवेदनशील होता है। परंतु मिलकर ये पूरे स्पेक्ट्रम को उजागर करते हैं यानी हमारी color vision संभव हो पाती है।
दरअसल कम रोशनी में देखने के लिए हम जिस रोड pigment मॉलिक्यूल का इस्तेमाल करते हैं, उसकी संरचना का पता तो दशकों पहले ही चल गया था। लेकिन अब तक वैज्ञानिक रंग पहचानने वाले cone opsins की संरचना का पता नहीं लगा पाए थे।
नई माइक्रोस्कोपी तकनीकों की मदद से शोधकर्ताओं ने जब इन opsins के एटॉमिक स्ट्रक्चर को देखा, तो पाया कि तीनों opsins में vitamin A से बना एक ही molecule Retinaldehyde होता है।
लेकिन तीनों Opsins इस अणु से अलग-अलग तरीके से bind करते हैं। Science जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि यही मामूली स्ट्रक्चरल बदलाव, ऑप्सिन्स को रोशनी की अलग-अलग वेवलेंथ के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि लाल और हरे opsin, नीले opsin की तुलना में ज्यादा तेज़ी से active होकर बंद हो जाते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है, कि इस स्टडी से Cone Dystrophy और रंग पहचानने से जुड़ी बीमारियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और उनके नए इलाज विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।

