Stockholm स्थित Karolinska Institute ने 5 अक्टूबर 2026 को फ़िजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की। अमेरिका के Karl Deisseroth और जर्मनी के Peter Hegemann व Georg Nagel.
इन वैज्ञानिकों को Light-gated ion channels की खोज और Optogenetics तकनीक विकसित करने के लिए चुना गया है, जिसने Neuroscience को एक नई दिशा दी। दरअसल, हमारे मस्तिष्क में 90 अरब से ज़्यादा न्यूरॉन्स हैं, और यह समझना कि कौन सा न्यूरॉन किस व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार है, neuroscience की सबसे बड़ी चुनौती थी।
Optogenetics ने इसका हल दिया – यह रोशनी को स्विच की तरह इस्तेमाल करके किसी ख़ास न्यूरॉन को मिलीसेकंड में ON या OFF कर सकती है। इसकी शुरुआत हुई 1990 में, जब Peter Hegemann ने एक छोटे शैवाल Chlamydomonas को रोशनी की तरफ़ तैरते हुए पाया। बाद में Georg Nagel के साथ मिलकर उन्होंने इसका कारण खोजा – एक प्रोटीन Channelrhodopsin, जो नीली रोशनी पड़ते ही खुल जाता है और इलेक्ट्रिक सिग्नल बनाता है।
फिर Karl Deisseroth ने इस प्रोटीन को चूहे के न्यूरॉन्स में डाला और ऑप्टिकल फाइबर से रोशनी पहुँचाई। नतीजा यह हुआ कि रोशनी के हुक्म पर न्यूरॉन तुरंत एक्टिव हो गए। 2007 में उन्होंने जीवित चूहे में यह सफलतापूर्वक कर के दिखाया।
आज यह तकनीक दुनिया भर में इस्तेमाल हो रही है। इससे वैज्ञानिक डर, चिंता, आक्रामकता, याददाश्त और प्यास जैसे व्यवहारों के पीछे के सर्किट को समझ रहे हैं। साथ ही अंधापन, अवसाद, लत और मनोभ्रंश जैसी बीमारियों के इलाज की नई संभावनाएँ भी खुल रही हैं।
नोबेल पुरस्कार की शुरुआत साल 1901 में महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार हुई थी। और आज भी यह पुरस्कार मानवता को उच्चतम लाभ पहुंचाने वाली वैज्ञानिक खोजों को अहमियत देता है।

