भारत के अंतरिक्ष मिशनों को और मज़बूत बनाने के लिए इसरो और सीएसआईआर अब तक अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते आए हैं। इसरो जहां अंतरिक्ष यान, रॉकेट और मिशनों को विकसित करता रहा है, वहीं सीएसआईआर ने विज्ञान, चिकित्सा, सामग्री और तकनीकी शोध में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। पहली बार दोनों संस्थाएँ एक साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि मानव अंतरिक्ष उड़ान को नई दिशा दी जा सके। इसी उद्देश्य से सीएसआईआर और इसरो ने मिलकर नवम्बर 17 को एक भव्य स्पेस मीट का आयोजन किया है, जो भारत के आने वाले मानव मिशनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
सीएसआईआर –इसरो स्पेस मीट 2025 का आयोजन सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, और इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन के नेतृत्व में किया जा रहा है। और इस भव्य कार्यक्रम के लिए nodal agency है बंगलुरु स्थित CSIR- National Aerospace Laboratories.
इस कार्यक्रम में डीआरडीओ, भारतीय विज्ञान संस्थान, भारतीय वायुसेना, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी- सीएनईएस जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ साथ, देश-विदेश के लगभग 200 वैज्ञानिक, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे मौजूद रहेंगे ।
इस एक दिन की स्पेस मीट का मुख्य उद्देश्य सीएसआईआर की अलग अलग क्षेत्रों में होने वाली रिसर्च को इसरो की तकनीकी जरूरतों से जोड़ना है। इसमें मानव अंतरिक्ष उड़ान के दौरान होने वाले शारीरिक बदलाव, बायो-मेडिकल उपकरण, माइक्रोग्रेविटी में जीवन विज्ञान, अंतरिक्ष यानों की देखभाल और संचालन से जुड़ी उन्नत तकनीकों पर चर्चा की जाएगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इस महत्वकांक्षी पहल से यह उम्मीद लगाई जा रही है की भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए यह meet एक संयुक्त रोडमैप तैयार करने में मदद करेगी।

