जैसे-जैसे गर्मियों में तापमान बढ़ता है, लोग राहत पाने के लिए अपने घरों में AC का इस्तेमाल करने लगते हैं। जिससे बिजली की खपत और बिजली का बिल तो बढ़ता ही है, साथ ही बाहरी वातावरण में गर्मी धकेली जाती है।
अब AC के इसी इस्तेमाल को और प्रभावी, किफ़ायती और इको फ्रेंडली बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक तैयार की है।
दरअसल, AC unit को कमरे की हवा को ठंडा करने के साथ-साथ, नमी के स्तर को भी कंट्रोल करना होता है। और vapour-compression system पर आधारित AC इसके लिए तापमान को ज़रूरत से ज्यादा ठंडा करते हैं।
जिससे कूलिंग कॉइल पर नमी कंडेंस हो सके। पर इससे ऊर्जा की खपत बहुत बढ़ जाती है। साथ ही आरामदायक तापमान पर रहने के लिए थर्मोस्टेट की सेटिंग को बार-बार एडजस्ट करने की ज़रूरत भी पड़ती है।
आईआईटी दिल्ली की टीम ने इस पूरे सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एक कंपैक्ट add-on module तैयार किया है, जो हवा को अत्याधिक ठंडा किए बिना नमी को कंट्रोल कर सकता है।
इस में एक तरल डेसिकेंट यानी नमक के घोल का उपयोग किया गया है, जो आने वाली हवा से जल वाष्प को सोख लेता है। और एक विशेष पॉलिमर झिल्ली, हवा और लिक्विड डेसीकेंट के बीच अवरोधक का काम करती है, जिससे नमक के कण कमरे के भीतर नहीं जा पाते।
जहां सामान्य Room AC की औसत बिजली खपत लगभग 1200 वॉट पर पहुंचती है, वहीं इस नई तकनीक से यह खपत 800 वॉट रह जाती है।
साथ ही, नमी सोखकर जब liquid desiccant पतला होता है, तो AC के बाहरी कंडेनसर से निकलने वाली गर्मी का इस्तेमाल उसे सुखाने में किया जाता है। जिससे यह सिस्टम तो लगातार चलता रहता है, पर AC units की वजह से वातावरण में फैलने वाली गर्मी में कमी आती है।
Journal of Building Engineering में प्रकाशित यह शोध कार्य बिजली खर्च को कम करने में, राष्ट्रीय पीक पावर डिमांड को घटाने में और पर्यावरण को बेहतर बनाने में अच्छा योगदान दे सकता है।

