fbpx
News Research

IIT गुवाहाटी ने विकसित की पानी से सीसा हटाने की बायोरेमीडिएशन पद्धति

 

IIT GUWAHATI RESEARCHERS

भारत के कई हिस्सों में पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। दूसरे प्रदूषकों के साथ-साथ रासायनिक प्रदूषकों का स्तर भी बढ़ता जा रहा है और इनमें सबसे बड़ा ख़तरा है सीसा यानि  Lead- जो की एक स्टेबल हैवी मेटल है।

हाल ही में जारी की गई Central Ground Water Board की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लगभग 9.3% पानी के नमूनों में ‘Lead’ सीमा से ज्यादा पाया गया है।  यह बहुत ही चिंताजनक है क्योंकि ‘सीसा’ बच्चों में न्यूरोलॉजिकल विकास के लिए घातक है.. और साथ ही यह किडनी की समस्याओं, ब्लड प्रेशर और यहां तक की कैंसर का कारक भी बनता है।

ज़ाहिर है कि पानी में मौजूद लैड्ड यानी सीसे को हटाना निहायती ज़रुरी है, पर मौजूदा रासायनिक तरीके न केवल महंगे हैं बल्कि खुद नये तरह का प्रदूषण पैदा कर देते हैं।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए IIT गुवाहटी के शोधकर्ता बायोरेमेडिएशन   यानी जैव-उपचार तकनीक को test कर रहे हैं। इसके लिए शोधकर्ताओं ने Phormidium corium NRMC-50  नामक एक साइनोबैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है जो पानी में मौजूद सीसे को सोख लेता है। दूसरे साइनोबैक्टीरिया की तरह इसको भी बढ़ने के लिए सूरज की रोशनी की ज़रूरत होती है।

रिसर्च टीम ने इस साइनोबैक्टीरिया का अध्ययन कर यह पता लगाया कि इसका कौन सा हिस्सा पानी से सीसे को सबसे अच्छी तरह से सोखकर हटा सकता है। पता चला की साइनोबैक्टीरियम के एक्सोपॉलीसैकेराइड्स यानि EPS पानी से 92.5% तक सीसा साफ करने में सक्षम है।

बायोरेमेडीएशन पर आधारित यह तकनीक पुरानी तकनीकों से करीब 40% से 60% तक सस्ती है और पर्यावरण के अनुकूल भी। लैब स्तर पर इस तकनीक ने बहुत अच्छे नतीजे दिए हैं और अब वैज्ञानिक इसे बड़े स्तर पर टेस्ट करने की तैयारी कर रहे हैं।

अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो पानी को सीसा- मुक्त करने और लोगों की सेहत बचाने में एक बड़ा कदम साबित होगी।

 

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like