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RUS-PAT वैज्ञानिकों ने खोजा शरीर के अंदर देखने का नया तरीका

 

A new medical imaging breakthrough is changing how we look inside the body.

California Institute of Technology (Caltech) और USC के वैज्ञानिकों ने मिलकर शरीर के अंदर देखने का नया तरीका खोजा है। यह एक ख़ास तकनीक है जो अल्ट्रासाउंड और रोशनी, दोनों की शक्ति को एक साथ इस्तेमाल करती है, इस नई तकनीक को वैज्ञानिकों ने RUS-PAT यानि Rotational Ultrasound and  Photoacoustic Tomography नाम दिया है।

इसकी मदद से सिर्फ soft tissues की बनावट ही नहीं, बल्कि blood vessels में बह रहे खून और उसमें मौजूद ऑक्सीजन की स्थिति को भी साफ़ और सही तरीके से देखा जा सकता है। जिससे शरीर के अंदर के हिस्सों की 3-डी रंगीन तस्वीरें तेज़ी से बनाई जा सकती हैं। इस शोध को Nature Biomedical Engineering जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

आम तौर पर Ultrasound सस्ता और तेज़ तरीका होता है, लेकिन यह केवल 2-D तस्वीर देता है।  पर इन तस्वीरों से खून की रासायनिक स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती।

वहीं फोटोअकॉस्टिक तकनीक में लेज़र की रोशनी शरीर के अंदर भेजी जाती है, जिसे कुछ अणु सोख लेते हैं। और इससे ध्वनि तरंगें बनती हैं, जिनसे रंगीन तस्वीर तैयार होती है। इससे Blood vessels तो साफ़ दिखाई देते हैं, लेकिन पूरे अंग की बनावट सही नज़र नहीं आती।

CT scan और MRI मशीनें शरीर की बनावट अच्छी दिखाती हैं, लेकिन वे महंगी होती हैं और  समय ज्यादा लेती हैं। साथ ही कभी-कभी कंट्रास्ट एजेंट या विकिरण का इस्तेमाल भी करना पड़ता है।

इसी समस्या को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने अल्ट्रासाउंड और फोटोअकॉस्टिक तकनीक को मिलाकर RUS-PAT सिस्टम बनाया। इसमें घूमने वाले Detector होते हैं, जो शरीर के चारों ओर घूमकर सिग्नल इकट्ठा करते हैं। इससे कम लागत में शरीर की साफ़ और पूरी जानकारी मिल जाती है। यह तकनीक उन हिस्सों में उपयोगी है, जहाँ रोशनी पहुँच सकती है।

इस नई तकनीक से ब्रेस्ट ट्यूमर की सही जगह और उसकी गतिविधि, मधुमेह से नसों को होने वाला नुकसान, और मस्तिष्क की बनावट और blood flow को पहले से ज्यादा साफ़ तरीके से देखा जा सकेगा।

फिलहाल अभी ये तकनीक लगभग 4cm गहराई तक स्कैन कर सकती है, और पूरा स्कैन एक मिनट से भी कम समय में पूरा हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है,  कि एंडोस्कोपिक उपकरणों का उपयोग करके प्रकाश को और अंदर पहुंचाया जा सकता है, जिससे शरीर में और गहराई तक पहुंच संभव हो सकती है।

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