उम्र बढ़ने के साथ नज़दीक से धुंधला दिखाई देना आम बात है.. जिसे presbyopia कहा जाता है। पढ़ना हो, या पास से कोई चीज़ देखनी हो, तो चश्मे का सहारा ज़रूरी हो जाता है।
पर हर वक्त चश्मा पहने रखना भी कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता है। इसी परेशानी को ख़त्म करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई आई ड्रॉप बनाई हैं, जो भविष्य में रीडिंग गलासेस की ज़रूरत को कम, या ख़त्म भी कर सकती हैं।
Copenhagen में हुई European Society of Cataract and Refractive Surgeons (ESCRS) की एक असेंबली के दौरान इन आई ड्रॉप पर किए गए अध्ययन के नतीजे पेश किए गए।
अध्ययन में यह पाया गया कि इन आई ड्रॉपस को डालने के एक घंटे बाद presbyopia वाले मरीज़ टेस्ट चार्ट की लाइनों को अच्छे से पढ़ पाए। और यही सुधार अगले दो सालों तक बना रहा ।
आई ड्रॉपस डालने के बाद कई मरीज़ों में temporary side effects भी देखे गए, जैसे हल्की जलन, सर दर्द, या फिर अस्थाई धुंधलापन.. पर शोधकर्ताओं के अनुसार ये सब सहने लायक पाया गया, यानी मरीज़ों को कुछ खास परेशानी नहीं हुई।
इस रिसर्च में 766 लोगों को शामिल किया गया था और सबको diclofenac तथा pilocarpine युक्त आई ड्रॉप्स दिन में दो बार दिए गए। इन लोगों को तीन समूह में बांटा गया, जिसमें हर ग्रुप में diclofenac की मात्रा तो फिक्स्ड रखी गई परंतु pilocarpine की मात्रा हर समूह के लिए अलग-अलग थी।
दिलचस्प बात यह रही कि सभी ग्रुप्स में प्रतिभागियों ने आई चार्ट पर अच्छे नतीजे दिए। नयी आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने के बाद, ज़्यादातर प्रतिभागी eye testing chart की दो से तीन लाइनें ज़्यादा अच्छी तरह से पढ़ पाए, और वो भी बिना चश्मे के।
अगर इन आई ड्रॉपस की पूर्ण सुरक्षा पर चल रहे अध्ययन सफल रहते हैं तो भविष्य में चश्मा बस एक ऑप्शन बन कर रह जाएगा..

