
धरती की गोद में पाए जाने वाले पेड़-पौधों के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन इनके नीचे, मिट्टी के अंधेरे में, एक ऐसी दुनिया फैली हुई है, जिसके बिना इनका फलना-फूलना मुश्किल होता।
इसी छिपी हुई दुनिया को सबके सामने लाने वाली America की विकासवादी जीवविज्ञानी “Toby Kiers” को साल 2026 के Tyler Prize के लिए चुना गया है, जिसे पर्यावरण का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है।
1973 में स्थापित टायलर पुरस्कार ने जेन गुडॉल सहित कई विश्व प्रसिद्ध पर्यावरण नेताओं को सम्मानित किया है। टोबी कियर्स इस पुरस्कार को पाने वाली सबसे कम उम्र की महिला विजेता हैं। 19 साल की उम्र से ही टोबी कियर्स ने मिट्टी के भीतर छिपे उन जीवों पर ध्यान दिया, जिन्हें लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं, विशेषतौर पर Mycorrhizal fungi पर।
यह फंगी या कवक ज़मीन के नीचे फैला एक विशाल जाल बनाते हैं, जो पेड़ों और पौधों की जड़ों से जुड़कर उन्हें नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व पहुंचाते हैं, और बदले में पौधों से शर्करा और वसा के रूप में carbon प्राप्त करते हैं।
पहले वैज्ञानिकों का मानना था, कि ये कवक केवल पौधों की मदद करते हैं। लेकिन टोबी कियर्स के शोध से यह पता चला, कि ये कवक सूचना और पोषक तत्वों के आदान-प्रदान की एक जीवित प्रणाली हैं, जो एक जैविक बाज़ार में चतुर व्यापारियों की तरह व्यवहार करते हैं।
शोध में सामने आया कि, इस आदान-प्रदान के चलते ये कवक हर साल लगभग 13 अरब टन कार्बन अपने अंदर जमा कर लेते हैं, और धरती को गर्म होने से बचाते हैं। यानी जलवायु को संतुलित रखने में भी इनकी भूमिका अहम है।
पिछले साल ही टोबी कियर्स और उनकी टीम ने इनके फैलाव को बेहतर समझने के लिए एक वैश्विक अंडरग्राउंड एटलस बनाया। यह एटलस वैज्ञानिकों के लिए ज़मीन के नीचे की Biodiversity को समझने का नक्शा बन गया है।
टोबी कियर्स का शोध हमें यह बताता है, कि ज़मीन के नीचे फैले ये कवक न सिर्फ पौधों को जीवन देते हैं, बल्कि धरती और जलवायु को बचाने की लड़ाई में भी हमारी सहायता कर रहे हैं।

