
घर में फल काटते समय अक्सर हम बिना सोचे-समझे इनके छिलकों को सीधे कूड़े में फेंक देते हैं और इससे धीरे-धीरे कचरे का पहाड़ खड़ा हो जाता है। और अगर इस कचरे का उचित निपटारा ना हो तो यह सफाई और पर्यावरण से जुड़ी कई समस्याएं पैदा करता है।
यही स्थिति नागालैंड में अन्नानास की बढ़ती खेती के साथ भी देखने को मिल रही है। अन्नानास खाने के बाद उसके छिलके और बेकार हिस्से को कूड़े में डाल दिया जाता है, जिससे कूड़ा और बढ़ता है और जैविक प्रदूषण का कारण बनता है।
लेकिन अब नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के ज़रिए इस समस्या का एक स्वादिष्ट हल निकाला है। वैज्ञानिकों ने पाइनएप्पल वेस्ट में छिपी एक बड़ी संभावना को देखा और इससे एक बढ़िया गुणवत्ता वाला सिरका तैयार किया।
वैज्ञानिकों के अनुसार protein, pectin, vitamins और minerals से भरपूर अन्नानास का वेस्ट सिरका बनाने के लिए बेहद उपयोगी पाया गया।
Yeast और acetic acid bacteria का प्रयोग करते हुए इससे पाइनएप्पल विनेगर बनाया गया, जो अम्लता, रंग, और स्वाद के मामले में दूसरे विनेगर से बेहतर साबित हुआ। अन्नानास में पायी जाने वाली ब्रोमेलिन एंजाइम के कारण इस सिरके का स्वाद और खुशबू और बेहतर हो गए।
वैज्ञानिकों के मुताबिक स्वाद की जांच में लोगों ने इसे अन्य सिरकों से ज़्यादा पसंद किया।
पाइनएप्पल विनेगर स्वाद और गुणवत्ता के मामले में बाजार में मिलने वाले सिरकों के बराबर ही नहीं, बल्कि कई मामलों में उनसे बेहतर साबित हुआ है, और इसमें मौजूद तत्वों के कारण यह सेहत के लिए भी फ़ायदेमंद है।
नागालैंड यूनिवर्सिटी का यह शोध waste to wealth का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह दिखाता है, कि सही सोच और विज्ञान के ज़रिए, कचरे को भी संपदा में बदला जा सकता है।

