
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत और United Kingdom में मंकीपॉक्स वायरस का रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन पाया गया है, जिसमें क्लेड आईबी और क्लेड आईआईबी, दोनों के जीनोमिक तत्व शामिल हैं।
भारत का मामला सितंबर 2025 में सामने आया था, जिसे पहले क्लेड IIb के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इस व्यक्ति ने अरब प्रायद्वीप की यात्रा की थी
वहीं UK में पहला मामला दिसंबर 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा करने वाले एक व्यक्ति में पाया गया और तब इसे क्लेड Ib के वर्ग में रखा गया था।
वायरस के संपूर्ण जिनोम सीक्वेंसिंग के बाद दोनों मामलों में वायरस को रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन के रूप में पहचाना गया।
वायरस जीनोम के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि दोनों व्यक्ति कुछ हफ्तों के अंतराल पर एक ही रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन से संक्रमित हुए थे। इससे संकेत मिलता है कि वर्तमान में रिपोर्ट किए गए मामलों से अधिक मामले हो सकते हैं।
रिकॉम्बिनेशन दरअसल तब होता है जब दो संबंधित वायरस एक ही व्यक्ति को संक्रमित करते हैं और जीनोमिक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे नया रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन बनता है।
एमपॉक्स के रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन के लक्षण सामान्य एमपॉक्स के समान ही हैं, जिनमें त्वचा पर दाने, बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।
अच्छी बात यह रही कि भारत और यूके में पाए गए रिकंबाइनेंट एमपॉक्स के दोनों ही मरीज़ों में गंभीर बीमारी नहीं पाई गई और संपर्क ट्रेकिंग के बाद कोई सेकेंडरी मामला भी नहीं मिला।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इस नए स्ट्रेन का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जोखिम अभी कम है, लेकिन इसकी निगरानी जारी रखना अति आवश्यक है।
ध्यान रहे कि मंकीपॉक्स वायरस से होने वाली यह बीमारी संक्रामक है, और मरीज़ के निकट संपर्क या उसकी इस्तेमाल की गई वस्तुओं से फैल सकती है।

