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अंतरिक्ष युग की नई समस्या: आसमान में बढ़ता धातु प्रदूषण

 

अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे को लेकर वैज्ञानिक पहले से चिंतित हैं और अब अट्मोस्फियर में राकेट के प्रवेश से होने वाले प्रदूषण पर भी  ध्यान दिया जा रहा है।

आज से 1 साल पहले, 19 फरवरी 2025 की सुबह, जब पृथ्वी पर वापस आ रहे फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा एक आग के गोले के रूप में फटा, तो इंग्लैंड से लेकर पोलैंड तक के वैज्ञानिक सचेत हो गए।

इस घटना ने जर्मनी में लाइबनिज़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ एटमॉस्फेरिक फ़िज़िक्स की एक रिसर्च टीम को अपने उपकरणों की ओर दौड़ने पर मजबूर कर दिया।

साइंटिस्ट दरअसल यह मापना चाहते थे कि रॉकेट ने धरती से 50 से 100 किलोमीटर ऊपर तक के वायुमंडल को कैसे प्रदूषित किया। वायुमंडल की इस लेयर को वैज्ञानिक इग्नोरोस्फीयर  (Ignorosphere) का नाम भी देते हैं क्योंकि इसकी स्टडी करना बहुत मुश्किल है।

वायुमंडल में तत्वों को मापने के लिए टीम ने LIDAR नामक तकनीक का उपयोग किया और बहुत सारी लेज़र पल्सेस भेजीं। इससे रॉकेट के ऊपरी स्टेज से निकलने वाले प्रदूषण को वैज्ञानिकों ने पहली बार मापा।

जर्नल कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर एक एरिया में metal लिथियम की मात्रा में अचानक बढ़ोतरी का पता लगाया।

इस स्टडी में चेतावनी दी गई है कि यह मामला आने वाले पॉल्यूशन का “अग्रदूत” है, यह देखते हुए कि पृथ्वी से जिन सभी सैटेलाइट्स को स्पेस में भेजने की प्लानिंग चल रही है, उन्हें लॉन्च करने के लिए कितने रॉकेट्स की ज़रूरत होगी!

चिंता जनक यह भी है कि अभी तक एटमोस्फियर की ऊपरी लेयर में प्रदूषण के इनपुट को टारगेट करने वाला कोई सही रेगुलेशन भी नहीं है।

शोध टीम का मानना है कि भले ही एटमोस्फियर के ये हिस्से हमसे बहुत दूर हैं, लेकिन अगर पैदा होने वाले पॉल्यूटेंट धरती के क्लाइमेट पर असर डालते हैं और हमें नुकसानदायक UV रेडिएशन से बचाने वाली लेयर में ओज़ोन को कम करते हैं, तो इनका धरती पर जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

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