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हिमालयन पट्टी पर बढ़ा भूकंप का ख़तरा—नई ज़ोनिंग में पूरा क्षेत्र गया Zone-6 में

 

India’s new seismic map

भारत ने अपने भूकंप क्षेत्रीकरण मानचित्र को संशोधित करके भूकंप तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी किए गए नए seismic zonation map में अब उच्चतम जोखिम वाला ज़ोन seismic zone VI होगा।

पूरे Himalayan Arc, यानी जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक को, उच्चतम जोखिम वाले क्षेत्र VI में रखा गया है। यह बदलाव भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच चल रहे टकराव को दर्शाता है, जिसके चलते हिमालयन क्षेत्र विनाशकारी भूकंपों के प्रति लगातार संवेदनशील है। नया वर्गीकरण हिमालयन पट्टी में एकरूपता लाता है, पहले यह पट्टी कहीं ज़ोन IV और कहीं ज़ोन V में रखी गई थी।

साथ ही, पहले ज़ोन V में आने वाला अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और गुजरात का एक हिस्सा भी अब ज़ोन VI में आ गए हैं।

पिछले seismic map पुराने भूकंपों की रिपोर्ट और मिट्टी की जानकारी पर आधारित हुआ करते थे। पर इस बार वैज्ञानिकों ने मल्टीप्ल डेटा आधारित probabilistic seismic hazard assessment यानि PSHA का इस्तेमाल किया गया है। यह मेथड केवल पुराने रिकॉर्ड नहीं देखता, बल्कि सक्रिय फॉल्ट्स, संभावित सबसे बड़े भूकंप, भूकंपीय तरंगों का फैलाव, मिट्टी के प्रकार और चट्टानों की संरचना-सबको जोड़कर ख़तरे का अनुमान लगाता है।

नए वर्गीकरण के हिसाब से भारत का 61% भूभाग अब मध्यम से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है और भारत की 75% आबादी अब सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में रहती है।

भूकंप के प्रति संवेदनशीलता को नए हिसाब से दर्शाने वाला यह मानचित्र, निर्माण कार्य और भूकंप के दौरान सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यह संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त निर्माण मानकों की आवश्यकता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में निर्माण के नियम और भी सख़्त होने चाहिएं। ख़ासकर स्कूल, अस्पताल, पुल और ऊँची इमारतें- सबको earthquake-resistant बनाना ज़रूरी है ताकि भारत भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहे।

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