fbpx
News Research

आंखों की पुतलियां बताती हैं हमारे दिल का हाल

Featured Video Play Icon

 

आंखों पर कई गाने और मुहावरे लिखे गए हैं। जैसे, आँखों ही आंखो में इशारा हो गया..आदि। आंखों पर आपको बहुत से मुहावरे भी मिल जाएंगे। जैसे, आंखे फेर लेना, आंखों से बातें करना। साहित्य और कविताओं में भी आंख, नयन, निगाह के हवाले से बहुत सी बातें सामने रखी जाती हैं, क्योंकि हम कुछ बोलें या ना, हमारी आंखे बहुत कुछ कह जाती हैं। अब यही बात वैज्ञानिकों ने शोध से साबित की है, वैज्ञानिक तरीके से।

जेम्स कुक विश्वविद्यालय, आस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस नए अध्ययन के मुताबिक़ हमारी आंख की पुतलियां अवचेतन मन की भावनाओं और मानसिक स्थिति को दर्शाती हैं । इन पुतलियों के आकार में परिवर्तन को शरीर का नर्वस सिस्टम कंट्रोल करता है, हम खुद नियंत्रित नहीं कर सकते।

जैसे जब हमारा मन किसी चीज की ओर आकर्षित होता है या हम उत्तेजित होते हैं, तो शरीर का ‘सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ सक्रिय हो जाता है, जो हमारी आंखों की पुतलियों को फैला देता है, और जब हम शांत होते हैं तो ‘पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम’ काम करने लगता है और पुतलियां वापस छोटी हो जाती हैं।

यानी फैली हुई पुतलियां इस बात का संकेत देती हैं कि सामने वाला आपकी बातों में दिलचस्पी ले रहा है उत्सुक है। यही हाल झगड़े, भागने, स्वादिष्ट भोजन करने या ध्यान करते वक्त भी होता है वहीं डर और तनाव की हालत में भी पुतलियों का आकार अपने आप बदल जाता है। बिल्कुल वैसे ही जैसे तेज़ रोशनी में आंखे सिकुड़ जाती हैं।

एक और रोचक बात, पाया गया कि इस मामले में पुरुष और महिलाओं पर पड़ने वाला प्रभाव या मनोस्थिति अलग तरह से काम करती है। पुरुषों की पुतलियां सीधे सीधे उनकी पसंद या न पसंद को दर्शाती हैं जबकि महिलाओं के मन की प्रतिक्रिया जटिल होती है वो ज्यादा  संवेदनशील होती हैं, यानी महिलाओं की पुतलियां अक्सर भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को ज्यादा  स्पष्ट तरीके से दर्शाती हैं।

तो अब आप थोड़ी सी कोशिश कर लोगों की आंखों की पुतलियों के आकार परिवर्तन से परिस्थिति के अनुसार उनकी मनोस्थिति का अंदाज़ा आसानी से लगा सकते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like