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News Research

आख़िर कैसे मिला पृथ्वी से 70 गुना बड़ा आवारा ग्रह?

 

Astronomers discover a massive rogue planet—70 times Earth’s size

हमारी गैलक्सी मे खगोलविदों ने एक अनोखे ग्रह की खोज की है, जो किसी भी तारे की परिक्रमा नहीं करता। यह ग्रह अंतरिक्ष में बिल्कुल अकेला भटक रहा है। वैज्ञानिकों ने खोजा कि यह एक फ्री-फ्लोटिंग (free-floating) या आवारा रोग (rogue) ग्रह है, जो पृथ्वी से करीब 10 हजार प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है, और इसका आकार लगभग शनि ग्रह के बराबर बताया जा रहा है।

आमतौर पर ग्रहों की पहचान उनके तारे से ही होती है, लेकिन यह ग्रह किसी तारे से जुड़ा नहीं है। यही वजह है की ऐसे ग्रहों को खोजना काफी मुश्किल होता है।

लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने न सिर्फ इस ग्रह को पहचाना, बल्कि इसकी दूरी और द्रव्यमान का भी पता किया, और इस तरह की खोज में यह पहली बार हुआ है।

साल 2024 में वैज्ञानिक एक दूर के तारे को देख रहे थे, और तभी उन्होंने देखा कि उस तारे की रोशनी थोड़ी देर के लिए अचानक बदल गई, और ज़्यादा चमकने लगी। यह बात सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि पृथ्वी पर मौजूद कई दूरबीनों और अंतरिक्ष में घूम रहे यूरोपीय गाया यान ने भी एक साथ देखी।

जब वैज्ञानिकों ने इस बदलाव की वजह ढूंढी, तो पता चला कि उस तारे के सामने से यह ग्रह गुज़रा था और ग्रह की Gravity ने तारे की रोशनी को थोड़ी देर के लिए मोड़ दिया, जिससे वो ज़्यादा चमकीली दिखाई दी। इस इफ़ेक्ट को ग्रेविटेशनल माइक्रो लेंसिंग कहा जाता है।

अध्ययन से पता चला कि यह ग्रह आकाशगंगा के घने केंद्र की दिशा में लगभग 9,950 प्रकाश-वर्ष दूर है। और इसका द्रव्यमान पृथ्वी से करीब 70 गुना ज्यादा है।

सैद्धांतिक मॉडल्स के अनुसार, ऐसा संभव है, कि ग्रह प्रणाली निर्माण के शुरुआती दौर में होने वाली शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण अंतःक्रियाएं, किसी ग्रह को प्लेनेटरी सिस्टम से निकालकर अंतरतारकीय स्थान की तरफ धकेल दें।

वैज्ञानिकों का मानना है, कि भविष्य में Nancy Grace Roman Space Telescope और चीन के Earth 2.0 जैसे अभियानों से ऐसी खोजें और तेज़ होंगी। और ग्रहों की प्रणालियों के बनने और कभी-कभी बिखरने को लेकर हमारी समझ को नई दिशा देंगी।

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