भारत आने वाले समय में अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के साथ-साथ चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की भी तैयारी कर रहा है। इन अभियानों की सफलता के लिए सबसे ज़रूरी होगा अंतरिक्ष यात्रियों का स्वास्थ्य और सुरक्षा।
इसी को सुनिश्चित करने के लिए इसरो ने हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि AIIMS के साथ एक MoU पर हस्ताक्षर किया है। इस समझौता ज्ञापन का मक़सद है, स्पेस मेडिसिन में ऐसे शोध और प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाना जिनसे एस्ट्रोनॉट्स को दीर्घकालीन अंतरिक्ष अभियानों के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिले।
वैज्ञानिकों के मुताबिक स्पेस में माइक्रो ग्रेविटी और रेडिएशन के चलते, अंतरिक्ष यात्रियों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे शरीर की मांसपेशियाँ और हड्डियाँ धीरे-धीरे कमज़ोर होने लगती हैं और अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से Immune System, heart, brain और blood circulation पर भी असर पड़ता है।
इसलिए अब ISRO और AIIMS एक साथ मिलकर मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा प्रणाली, आंतों के सूक्ष्म जीवाणु, तंत्रिका तंत्र और हड्डियों पर अंतरिक्ष के प्रभाव का अध्ययन करेंगे। साथ ही अंतरिक्ष वातावरण के लिए विशेष चिकित्सा उपकरणों, उपचार प्रक्रियाओं और निगरानी प्रोटोकॉल को विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
इस प्रयास से न केवल अंतरिक्ष अभियानों के लिए, बल्कि धरती के लिए भी नई चिकित्सा तकनीकों को विकसित करने में मदद मिलेगी।

