
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के गोल्डफील्ड्स इलाके में शोधकर्ताओं ने एक खास तरह के कवक की खोज की है। इस कवक का नाम फ्यूज़ेरियम ऑक्सीस्पोरम (Fusarium oxysporum) है, जो सोने के साथ एक अनोखे तरीके से प्रतिक्रिया करता है।
शोधकर्ताओं ने बताया की इस कवक का रंग गुलाबी है, ये जीव जमीन के अंदर मौजूद खनिजों को तोड़कर पहले उन्हें घोलता है, फिर सोने को छोटे छोटे कणों में अपने धागे जैसे हिस्सों, जिन्हें हाईफे (Hyphae) कहा जाता है, उसमें जमा कर देता है। और यही छोटे कण मिलकर ठोस सोने के क्रिस्टल बना लेते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस प्रक्रिया में कवक superoxide नाम का केमिकल बनाता है, जो सोने को oxidized करके उसे अपनी सतह पर चिपकने में मदद करता है। यही वजह है कि कवक पर सोने की परत बन जाती है।
Commonwealth Scientific and Industrial Research Organisation यानी CSIRO के शोध में ये भी पाया गया, कि जिन कवक पर सोना जमा होता है, वो कवक काफी तेजी से बढ़ते है, और आकार में भी बड़े होते हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है, की इस प्रक्रिया में सोना एक Catalyst की तरह काम करता है, जो उनकी जैविक क्रियाओं को तेज करता है, और Nutrients को बेहतर तरीके से लेने में मदद करता है। इस खोज को Nature Communications में प्रकाशित किया गया है, और इसे भविष्य की खनन तकनीक के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रक्रिया को Bio-mining कहा जाता है, इसमें सूक्ष्म जीवों की मदद से धातुएं निकाली जाती हैं। इस तकनीक को वैज्ञानिक अब चंद्रमा और मंगल ग्रह पर इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं। इसके साथ ये कवक पृथ्वी पर सोने के भंडार का पता लगाने में भी सहायक हो सकता है, जिससे खनन प्रक्रिया आसान और किफायती बन सकती है।

