
हाल ही में भारत के National Institute of Immunology (NII) समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शोधकर्ताओं ने मिलकर, मलेरिया परजीवी में एक प्रोटीन की खोज की है, जो भविष्य की मलेरिया-रोधी दवाओं के लिए एक बेहतर टारगेट बन सकता है।
ऑरोरा-रिलेटेड काइनेज 1 (ARK1) नाम का यह प्रोटीन Plasmodium परजीवी के विकास और प्रसार के लिए बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यह कोशिका विभाजन प्रक्रिया के दौरान एक ट्रैफिक कंट्रोलर की तरह काम करता है।
यह सुनिश्चित करता है, कि multiplication के दौरान plasmodium का आनुवंशिक पदार्थ सही तरीके से अलग हो। प्रयोगों में जब इस प्रोटीन को निष्क्रिय किया गया, तो Plasmodium ठीक से प्रजनन नहीं कर पाया। यानी मनुष्यों और मच्छरों, दोनों में, अपना जीवन चक्र पूरा नहीं कर सका, जिससे इसके फैलने की क्षमता रुक गई।
शोधकर्ताओं के अनुसार, मलेरिया परजीवी का Aurora Complex मानव कोशिकाओं से काफी अलग है, इसलिए ऐसी दवाएं विकसित की जा सकती हैं, जो केवल परजीवी के ARK1 को ही निशाना बनाएं, बिना मानव कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 24 से 25 करोड़ लोग मलेरिया से संक्रमित होते हैं, जबकि 6 लाख से ज्यादा लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है।
हालांकि मलेरिया को रोकने और इलाज के लिए दवाएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन समय के साथ परजीवी में दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ARK1 को टारगेट करने वाली नई दवाएं न सिर्फ ज्यादा प्रभावी हो सकती हैं, बल्कि लंबे समय में ज्यादा किफायती और टिकाऊ समाधान भी साबित हो सकती हैं।

