
भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी में, इसरो ने लद्दाख में मिशन मित्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। पांच दिन के इस अभियान को लेह के पास स्थित लिकिर गांव में लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर आयोजित किया गया था।
इस मिशन का मकसद था- अंतरिक्ष अभियान जैसी मुश्किल परिस्थितियों में संभावित गगन-यात्रियों की मानसिक और शारीरिक क्षमताओं को पृथ्वी पर ही टैस्ट करना। इस कठिन परीक्षण में कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड, सीमित संसाधन के अलावा, एकांत जैसी स्थितियों को शामिल किया गया।
ध्यान रहे कि ऊंचाई पर ऑक्सीजन कम होने से इंसानी दिमाग और शरीर सही से काम नहीं कर पाते। इसके साथ ही -11°C से -14°C तक की कड़ाके की ठंड, शरीर के संतुलन और सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेती है।
मिशन के दौरान प्रतिभागियों को एक सख्त दिनचर्या का पालन करना पड़ा, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी ही थी। उन्हें सीमित खाना और पानी दिया गया, उनसे बात करने में देरी की गई, और उन्हें अधूरी जानकारी में फैसले लेने पड़े। इससे उनकी मानसिक मज़बूती, निर्णय लेने की क्षमता और टीम में काम करने की योग्यता को परखा गया।
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी भी मानव अंतरिक्ष मिशन की सफलता केवल तकनीक पर ही नहीं, बल्कि टीम के तालमेल और तनाव में काम करने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।
ये अभियान ISRO, Indian Air Force के Institute of Aerospace Medicine और एक स्टार्टअप के सहयोग से पूरा हुआ। और इस अभियान का सारा डेटा गगनयान मिशन और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
इसके अलावा, ISRO इस साल के अंत तक त्सो कार क्षेत्र में एक और मिशन आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। जिससे भारत अंतरिक्ष में मानव मिशनों के लिए और मज़बूत बन सकेगा।

