
नागालैंड के पहाड़ी इलाकों में रहने वाली कोन्याक जनजाति काफी लंबे समय से जड़ी-बूटियों से इलाज करती आ रही है। इस जनजाति के लोग एक खास हर्बल मिश्रण का इस्तेमाल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में भी करते हैं। अब वैज्ञानिकों ने इस पारंपरिक ज्ञान को गहराई से समझने की कोशिश की है।
नागालैंड विश्वविद्यालय, बरहामपुर विश्वविद्यालय और सवेथा मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने मिलकर इस मिश्रण का अध्ययन किया।
शोधकर्ताओं ने आधुनिक तकनीकों जैसे Gas Chromatography-Mass Spectrometry (GC-MS) और Molecular Simulation का उपयोग किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन जड़ी-बूटियों में कौन-कौन से रसायन मौजूद हैं, और ये किस तरह से शरीर में काम करते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि इस हर्बल मिश्रण के कुछ compounds एक अहम प्रोटीन VEGFR2 को निशाना बनाते हैं। यही प्रोटीन ट्यूमर को बढ़ने के लिए नए blood vessels बनाने में मदद करता है।
शोधकर्ताओं का कहना है, की जब इस प्रोटीन को रोका जाता है, तो ट्यूमर को पोषण नहीं मिल पाता, जिससे ट्यूमर के बढ़ने की क्षमता कम हो सकती है। साथ ही, इस मिश्रण की Toxicity भी कम पाई गई। अध्ययन में यह भी सामने आया कि इन compounds का Pharmacokinetic Profile अच्छा है, यानी शरीर इन्हें सही तरीके से उपयोग कर सकता है।
हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए अभी लैब और क्लिनिकल टेस्ट जरूरी हैं, क्योंकि कंप्यूटर विश्लेषण पर आधारित यह अध्ययन अभी शुरुआती चरण में है।
Microchemical Journal में प्रकाशित यह अध्ययन दिखाता है कि विज्ञान समस्याओं के समाधान के लिए हर तरह के ज्ञान का परीक्षण कर सकता है। और जो ज्ञान परीक्षण में प्रमाणों के साथ सही सिद्ध हो, उससे प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

