
जर्मनी के कोलोन शहर में एक प्रयोग शुरू होने जा रहा है, जहाँ छह लोग 100 दिनों तक पूरी तरह बंद माहौल में रहेंगे। इस स्टडी का नाम SOLIS100 (Study Of Long-term ISolation) है, जिसे European Space Agency (ESA) और German Aerospace Center (DLR) मिलकर कर रहे हैं।
ये प्रयोग DLR के एनविहैब रिसर्च सेंटर में किया जा रहा है, जिसे अंतरिक्ष जैसे माहौल तैयार करने के लिए ख़ास तौर पर डिज़ाइन किया गया है। इसका मकसद यह समझना है कि लंबे समय तक अलग-थलग रहना, सीमित संसाधनों में जीना और बंद माहौल में रहना इंसान के शरीर और मानसिक स्थिति पर क्या असर डालता है।
इस प्रयोग मे शामिल छह लोगों को 100 दिनों तक एक साथ रहना होगा और उनकी दिनचर्या भी बिल्कुल अंतरिक्ष यात्रियों जैसी होगी। उन्हें टीमवर्क करना होगा, वैज्ञानिक काम पूरे करने होंगे और रोज नई चुनौतियों का सामना करना होगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य में इंसान चांद और मंगल पर लंबे मिशन पर जाने की योजना बना रहा है। ऐसे मिशनों में महीनों या सालों तक अलग-थलग रहना पड़ सकता है, इसीलिए इस तरह के प्रयोग ज़रूरी हैं।
ये प्रयोग भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बेहतर ट्रेनिंग, संतुलित भोजन, दवाइयों और मज़बूत मानसिक सहायता प्रणाली विकसित करने में मददगार साबित होगा। साथ ही इसे चंद्रमा और मंगल जैसे लंबे अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

