अंतरिक्ष अभियानों को सस्ता और आसान बनाने की दिशा में रीयूजेबल रॉकेट तकनीक पर कई देश काम कर रहे हैं।
अमेरिका की SpaceX कंपनी तो इस तकनीक में एक्सपर्ट बन चुकी है, जिसने अपने Falcon 9 रॉकेट के बूस्टर को अंतरिक्ष में भेजने के बाद कई बार धरती पर सफलतापूर्वक उतारा है, और दोबारा इस्तेमाल किया है।
भारत भी ISRO की VTVL तकनीक और Agnikul Cosmos जैसी निजी कंपनियों के ज़रिए इस दिशा में काम कर रहा है। चीन की प्राइवेट स्पेस कंपनी LandSpace भी झूके-3 रॉकेट के साथ, रीयूजे़बल रॉकेट तकनीक में सफल होने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
दिसंबर 2025 में की गई कोशिश में यह रॉकेट टारगेट एरिया तक तो पहुँच गया था, लेकिन सफलतापूर्वक लैंडिंग नहीं कर पाया।
19 अगस्त 2026 को LandSpace ने फिर से, लगभग 66 मीटर लंबे झूके-3 रॉकेट को लॉन्च किया। रॉकेट ने Honghu-03 सैटेलाइट को सही सलामत अंतरिक्ष में पहुंचाकर ऑर्बिट में स्थापित किया।
इसके बाद रॉकेट का बूस्टर धरती पर वापस लौटा और लगभग 390 किलोमीटर दूर Gansu Province के लैंडिंग स्थल पर सुरक्षित उतर गया। Landing legs का उपयोग करके यह चीन की पहली भूमि-आधारित आर्बिटल बूस्टर रिकवरी थी।
परंतु लैंडिंग के कुछ ही देर बाद, बचे हुए प्रोपेलेंट से आग लग गई। जिससे कार्बन फाइबर से बनी एक लैंडिंग लेग कमज़ोर हो गई और बूस्टर पलटकर गिर गया। यानी लैंडिंग के बाद वाले चरण को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी को अभी और काम करना पड़ेगा।

