20 October 2018 को लॉन्च किया गया ‘BepiColombo (बेपीकोलोंबो) मिशन’ करीब 8 साल तक सफ़र करते हुए अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव में पहुंच गया है। इस मिशन में ‘दो साइंटिफिक आर्बिटर एक साथ’ बुध ग्रह की तरफ़ यात्रा कर रहे हैं।
जिनमें से एक है ESA का Mercury Planetary Orbiter (MPO) जो बुध की सतह और उसके अंदरूनी हिस्से का अध्ययन करेगा। और दूसरा है JAXA का Mercury Magnetospheric Orbiter (Mio) जो बुध के चुंबकीय क्षेत्र और उस पर सौर हवाओं के असर को समझेगा।
चूंकि बुध ग्रह सूर्य के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र की गहराई में स्थित है, इसलिए पृथ्वी से बुध की तरफ़ सीधी यात्रा करने वाला अंतरिक्ष यान, धीमा होने की बजाय तेज़ हो जाता है। यही वजह है कि बेपीकोलोंबो ने अपनी गति धीरे-धीरे कम करने के लिए सीधे रास्ते के बजाय 9 फ्लाईबाय किए- 1 पृथ्वी के पास, 2 शुक्र के पास और 6 बुध के पास।
सौर मंडल के भीतरी भाग में लगभग 9 अरब किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद, इस मिशन को दिशा देने वाला मरकरी ट्रांसफर मॉड्यूल भी 3 सितंबर 2026 को इससे अलग हो चुका है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, मिशन का अगला बड़ा पड़ाव 21 नवंबर 2026 होगा, जिस दिन इसके बुध की कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद अगर सब ठीक रहा तो दोनों आर्बिटर 9 दिसंबर 2026 को अलग हो सकते हैं।
यदि बेपीकोलोंबो मिशन सफल होता है, तो यह बुध की कक्षा में प्रवेश करने वाला दूसरा मिशन होगा, और एक साथ दो ऑर्बिटर स्थापित करने वाला पहला मिशन बनेगा।

