भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने Bharatiya Antariksh Station (BAS) के लिए महत्वाकांक्षी रोबोटिक सिस्टम की योजना पेश की है। इसके तहत आने वाले वर्षों में भारत के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ रोबोट भी space में काम करते नज़र आएंगे।
योजना है कि भारतीय स्पेस स्टेशन के अंदर और बाहर रोबोटिक आर्म्स लगाए जाएंगे और इसमें ‘फ्री-फ्लाइंग’ सिस्टम और इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट भी शामिल होंगे। इसके अलावा इसमें लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पाँच मॉड्यूल वाले एक स्टेशन की रूपरेखा बताई गई है, जिसमें सभी मॉड्यूलों को आपस में जोड़ने यानी डॉकिंग की सुविधा होगी।
इसमें सबसे पहला मॉड्यूल BAS-01 (Base Module) होगा, जिसका इस्तेमाल नई तकनीकों के परीक्षण के लिए किया जाएगा। दूसरे मॉड्यूल BAS-02 (Core-Docking Module) में डॉकिंग की सुविधा, पेलोड रैक और व्यायाम के उपकरण होंगे, ताकि माइक्रोग्रैविटी में रहने से शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को कम किया जा सके।
तीसरा मॉड्यूल BAS-03 (Science Module) वैज्ञानिक प्रयोगों और स्पेस वॉक में मदद करेगा। और वहीं चौथे मॉड्यूल BAS-04 (Laboratory Module) में एक खास खिड़की होगी, जिससे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी को देख सकेंगे। पांचवां मॉड्यूल BAS-05 (Common Working Module) स्टेशन के विस्तार में मदद करेगा। इसके ज़रिए भविष्य में कार्गो यान और दूसरे मॉड्यूल स्टेशन से जोड़े जा सकेंगे।
यह स्टेशन जीवन और काम करने के लिए सारी सुविधाएं देते हुए तीन से चार अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक रख सकेगा। इसके अलावा इसमें छोटे मिशनों के लिए तीन और लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी होगी।
ISRO ने 2028 तक स्टेशन का पहला मॉड्यूल लॉन्च करने, और 2035 तक सभी पांच मॉड्यूल के साथ पूरा स्टेशन तैयार करने का लक्ष्य रखा है।

