
हमारा ब्रह्मांड रहस्यों से भरा है और इसका अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक, अंतरिक्ष में ऐसे किरदारों को ढूंढते रहते हैं जो हमारे ब्रह्मांड की कहानी को आगे बढ़ा पाएं, ऐसा ही दिलचस्प किरदार है इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट 3-आई-एटलस।
हमारे सौरमंडल में बाहर से आए इस मेहमान को, इसी वर्ष जुलाई में, एटलस सर्वे टेलीस्कोप द्वारा चिन्हित किया गया और तभी से यह लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
तीव्र गति से हाइपरबोलिक पथ पर चलते हुए इस अंतर-तारकीय पिंड को, धरती और स्पेस में स्थित अलग-अलग टेलीस्कोप्स और अंतरिक्ष में भेजे गए कई अभियानों ने देखा और अलग-अलग वेवलेंथ में इसकी तस्वीरें लीं।
इन अवलोकनों से यह पता चला कि 3-आई-एटलस एक धूमकेतु है। इसके चमकते कोमा, धूल तथा गैस की पूंछ के विस्तार, और ‘पानी, CO2 और CO जैसे विशिष्ट आणविक संकेत’ यह दिखाते हैं कि यह अंतरतारकीय अंतरिक्ष से उत्पन्न होने के बावजूद, गर्म होने पर एक विशिष्ट सौर मंडल धूमकेतु की तरह व्यवहार करता है।
नवंबर 2025 में इसरो की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला ने भी इसकी छवियां और स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा एकत्र किया और इसके धूमकेतु होने की पुष्टि की।
1.2 मीटर माउंट आबू दूरबीन के उपयोग से किए गए इन प्रेक्षणों से इसकी संरचना का पता लगाने में मदद मिली, जिसमें जल, CO2 और कार्बनिक पदार्थ पाए गए। यह संकेत मिले कि इसका निर्माण किसी अन्य तारामंडल के ठंडे, दूरस्थ भाग में हुआ होगा।
इस समय 3-आई-एटलस पृथ्वी के करीब से गुज़र रहा है और शुक्रवार, 19 दिसंबर, 2025 को, यह नज़दीकी अपने चरम पर होगी। तब यह पृथ्वी से 270 मिलियन किलोमीटर की दूरी से गुज़रेगा और वैज्ञानिकों को इस पिंड का अध्ययन करने का एक अनूठा अवसर मिलेगा।
इस दूरी से पृथ्वी को कोई ख़तरा नहीं होगा, लेकिन यह इतना करीब ज़रूर होगा कि जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप जैसी दूरबीनें इसका विस्तृत अवलोकन कर सकें।
नासा का कहना है कि सौर मंडल से बाहर निकलने से पहले यह कई महीनों तक दूरबीनों और अंतरिक्ष अभियानों को दिखाई देता रहेगा और इसके बारे में इकट्ठी की गई हर जानकारी वैज्ञानिकों के लिए किसी रोमांच से कम नहीं होगी।

