
दिल्ली, आम तौर पर जब हम इस शहर की बात करते है तो हमे भीड़ भरी सड़कें, ऊंची इमारतें, ऐतिहासिक धरोहरें और बढ़ता प्रदूषण याद आता है। लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि इसकी अपनी बायोडायवर्सिटी भी है.. जिसमें विभिन्न प्रजातियां निवास करती हैं.. । हाल ही में Records of the Zoological Survey of India पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन नें एक बार फिर हमारा ध्यान इस ओर खींचा है । आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली में बिच्छुओं की चार ऐसी प्रजातियां पायी गई हैं जिन्हें अब तक यहां नहीं देखा गया था । ये सफलता दिल्ली के रामानुजन कॉलेज के पर्यावरण अध्ययन विभाग में सहायक प्रोफेसर गौरव बड़ादिया और उनकी टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में मिली ।
असल में शोधकर्ताओं का ये दल दिल्ली के शहरी और वन क्षेत्र जैसे जहांपनाह सिटी फॉरेस्ट , Aravali Biodiversity park, और Lodhi Garden मे सांपों पर सर्वे कर रहा था, इस दौरान उन्होंने बिच्छुओं की चार प्रजातियों की पहचान की- चेरसोनेसोमेट्रस फुलवाइप्स, आइसोमेट्रस मैकुलेटस, कॉम्प्सोबुथस रगोसुलस और लाइकास सीएफ. बिहारेंसिस
शोधकर्ताओं ने हर प्रजाति के एक एक बिच्छू को सावधानी से इकट्ठा किया और पहले उन्हें 40% ethyl alcohol मिक्स एटमॉसफियर में रखा गया, ताकि वे शांत हो जाएं, फिर उन्हें 70% ethyl alcohol में शिफ्ट किया गया, ताकि उनपर गहराई से अध्ययन किया जा सके।
रामानुजन कॉलेज के पर्यावरण अध्ययन विभाग में सहायक प्रोफेसर गौरव बड़ादिया ने अपने अध्ययन और दिल्ली कि बायोडायवर्सिटी मे बिच्छुओं के योगदान पर ज़ोर देते हुये कहा कि “ बिच्छू ऐसे insects होता है जो अनेकों छोटे insects को शिकार बनाते है इसके साथ ही साँप और पक्षियाँ है जो इन्हे अपना शिकार बनाती हैं। इसके अलावा ये अपना घर बनाने के लिए मिट्टी को खोदते है जिससे मिट्टी मे हवा और ऑक्सिजन प्रवेश करता है।”
दिल्ली में बिच्छुओं की इन प्रजातियों की उपस्थिति ने उम्मीद की एक किरण जागाई है अगर हम हरियाली का ध्यान रखें और राष्ट्रीय राजधानी के प्रदूषण को कंट्रोल कर लें तो न जाने कितने विलुप्त हो रहे जीव जंतुओं को बचा सकते हैं ।

