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रूस के चांद मिशन को बड़ा धक्का, लैंडिंग से एक दिन पहले लूना-25 क्रैश

रूस के चांद मिशन को बड़ा धक्का लगा है। रूस का लूना-25 मिशन चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग से ठीक एक दिन पहले क्रैश कर गया। रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कॉस्मॉस ने इसकी पुष्टि की है। रूस ने 47 साल में पहली बार अपना मून मिशन लॉन्च किया था। बीते शुक्रवार को यह उपग्रह चांद के लिए रवाना हुआ था। कल इसे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना था। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी होने की संभावना का पता लगाने के लिए भारत ने भी 14 जुलाई को चंद्रयान-3 भेजा है। इसके 23 अगस्त को वहां सॉफ्ट लैंडिंग करने की संभावना है।

ऐसे हुआ हादसे का शिकार

रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कॉस्मॉस ने रविवार को कहा कि रूस का लूना-25 अंतरिक्ष यान अनियंत्रित कक्षा में घूमने के बाद चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एजेंसी ने कल ही लूना-25 में लैंडिंग से पहले समस्या आने के बारे में बताया था। एजेंसी ने बयान में कहा कि यान का पता लगाने और उससे संपर्क करने के लिए 19 और 20 अगस्त को किए गए उपाय असफल रहे।

रोस्कॉस्मॉस ने आगे कहा, ”उपकरण अप्रत्याशित कक्षा में चला गया और चंद्रमा की सतह से टकराव के चलते अब इसका अस्तित्व खत्म हो गया है।” एजेंसी ने कहा कि एक “असामान्य स्थिति” उत्पन्न हुई जब मिशन नियंत्रण ने 21 अगस्त के लिए तय सॉफ्ट लैंडिंग से पहले शनिवार को 11:10 जीएमटी पर यान को प्री-लैंडिंग कक्षा में ले जाने की कोशिश की। “ऑपरेशन के दौरान, ऑटोमेटिक स्टेशन पर एक असामान्य स्थिति उत्पन्न हुई, जिसने तय मापदंडों के साथ इसे कक्षा में ले जाने की अनुमति नहीं दी… शनिवार को 11:57 जीएमटी पर लूना-25 के साथ संचार टूट गया।”

लूना-25 के एक साल तक चंद्रमा पर काम करने वाला था। यह वहां पर मिट्टी के नमूने एकत्र करने और पानी की तलाश करने वाला था। उम्मीद थी कि इन जानकारियों का इस्तेमाल भविष्य के प्रक्षेपणों के लिए रॉकेट ईंधन बनाने और वहां रहने के लिए संभावित कॉलोनियों बसाने के लिए किया जा सकता है। लैंडर पर लगे कैमरों ने चंद्रमा की सतह की तस्वीरें ली थीं। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू की जाएगी। लेकिन एजेंसी ने स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि क्या तकनीकी समस्याएं हुई होंगी।

रूस के लिए बड़ा झटका

चांद के लिए हाल के सालो में बड़े देशों के बीच प्रतिस्पर्धा नए सिरे से शुरू हुई है। इस मिशन की विफलता शीत युद्ध के गौरवशाली दिनों के बाद से अंतरिक्ष शक्ति के रूप में रूस की अहमियत कम होने को रेखांकित करती है। तब रूस पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह लॉन्च करने वाला पहला देश था।

23 अगस्त को चंद्रयान-3 की लैंडिंग

भारत औऱ रूस भी इस दौड़ में शामिल थे कि कौन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग कराता है। भारत का चंद्रयान-3, 23 अगस्त को शाम करीब 6 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला है।

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