
टाइफॉयड के प्रमुख लक्षणों में लंबे समय तक तेज़ बुखार, थकान, सिरदर्द, और पेट दर्द शामिल हैं, जो इलाज न होने पर गंभीर रूप धारण कर सकते हैं।
सैल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया से होने वाला यह गंभीर और जानलेवा इंफेक्शन आंतों और रक्तप्रवाह को संक्रमित करता है, और दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है।
इसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल होता आ रहा है, जिससे आमतौर पर एक हफ्ते के अंदर मरीज़ में सुधार देखा जाता है। परंतु वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में इस बीमारी के खिलाफ एंटीबायोटिक दवाओं का असर भी कम होता जा रहा है। क्योंकि इस बैक्टीरिया के एंटीबायोटिक-रेज़िस्टेंट स्ट्रेन उभर रहे हैं।
हाल के वर्षों में हुई एक रिसर्च के तहत नेपाल, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से हज़ारों नमूनों की जांच की गई। अध्ययन में पता चला कि टाइफॉयड का एक नया और ख़तरनाक रूप Extensively Drug Resistant Typhoid यानि XDR टाइफॉयड, तेज़ी से फैल रहा है, और इसके खिलाफ केवल एक एंटीबायोटिक एज़िथ्रोमाइसिन ही काम कर रही है। पर बैक्टीरिया के बदलते स्वरूप के चलते हो सकता है कि भविष्य में एज़िथ्रोमाइसिन भी काम ना कर पाए।
इसलिए वैज्ञानिकों का कहना है, की इस पर नई रिसर्च और नई दवाइयों की भी ज़रूरत है, जिससे इसे नियंत्रित किया जा सके।
वैज्ञानिकों और विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है, कि इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण, साफ पानी और अच्छी स्वच्छता है। इसके बचाव के लिए बच्चों को टाइफॉयड वैक्सीन लगाना बहुत ज़रूरी है। साथ ही संक्रमित इलाकों में जाने से पहले वयस्कों को भी टाइफाइड का टीका जरूर लगवाना चाहिए।
यानी टाइफॉयड दुनिया के लिए बड़ी चुनौती न बने इसके लिए बचाव और स्वच्छता के साथ-साथ नए शोध भी अत्यंत ज़रूरी है।

