
पूरी दुनिया प्लास्टिक के प्रयोग से जुड़ी समस्या से जूझ रही है। पीने के पानी से लेकर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तक हर जगह प्लास्टिक ने अपनी एक अलग जगह बना ली है, भले ही यह हमारे स्वास्थ्य या पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो।
प्लास्टिक के खतरे को कम करने या इसका विकल्प ढूँढने का प्रयास हर स्तर पर किया जा रहा है। इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए, आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा नया कम्पोज़िट मटेरियल तैयार किया है, जो दिखने में तो एकदम प्लास्टिक जैसा है, पर बना है बांस की एक खास किस्म बम्बूसा टुल्डा (Bambusa tulda) से। साथ ही इसमें बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर का भी इस्तेमाल किया गया है।
शोधकर्ताओं ने बम्बूसा टुल्डा से बने इस खास मटेरियल को परखने के लिए बायो-बेस्ड या पेट्रोलियम-बेस्ड कम्पोज़िट के साथ मिलाकर चार अलग-अलग मटेरियल तैयार किए और उन्हें 17 अलग-अलग पैमानों पर परखा।
नतीजों से पता चला कि बायो-आधारित एपॉक्सी फॉर्मूलाइट से बने बांस कम्पोज़िट ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। यह मटेरियल कम नमी सोखता है, मज़बूत है, कम या ज्यादा तापमान पर भी स्थिर रहता है, और इसकी लागत भी बहुत कम है। यानी पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ किफायती भी है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस मटेरियल का उपयोग भविष्य में कारों के डैशबोर्ड, दरवाज़ों और सीटों में किया जा सकता है—जिससे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम किया जा सकेगा।

