हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के लिए एक और अहम परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस परीक्षण में अंतरिक्ष यान के Crew module और service module को अलग करने वाले सिस्टम की जांच की गई।
Crew module वह हिस्सा है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री बैठकर अंतरिक्ष में जाएंगे। वहीं service module अंतरिक्ष यान को ज़रूरी सुविधाएं देता है। जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर वापस लौटेंगे, तो क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से अलग होना होगा। इसके बाद क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करके वापस आएगा।
वापसी के दौरान दोनों मॉड्यूल्स का सही समय पर अलग होना बहुत ज़रूरी है। अगर इस प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी होती है, तो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है। इसलिए ISRO ने अलग होने वाले सिस्टम के साथ-साथ झटकों से बचाव और दूसरे ज़रूरी उपकरणों की भी जांच की।
यह परीक्षण केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में किया गया। इसमें Navigation systems, electronic devices और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच भी शामिल थी।
गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में भेजने और सुरक्षित वापस लाने की योजना है।
अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले ISRO मानवरहित मिशनों के ज़रिए अंतरिक्ष यान की सुरक्षा और तकनीकी प्रणालियों की जांच करेगा। इस कड़ी में पहला मानवरहित मिशन G1 होगा जिसे इसी साल 2026 में लॉन्च करने का लक्ष्य है।

