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भारत में बढ़ता भूजल प्रदूषण बन रहा है चिंता का विषय

 

हाल ही में जारी Central Ground Water Board 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अनेक राज्यों के भूजल में ख़तरनाक रसायन पाए गए हैं, जो पूरे देश के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इसका सीधा संबंध हमारी सेहत से है।

रिपोर्ट से पता चला कि भारत के 71.7% भूजल सैम्पल BIS मानकों के अनुसार सुरक्षित हैं, लेकिन 28.3% सैंपल्स में एक या अधिक प्रदूषक सुरक्षित सीमा से ऊपर पाए गए।

नाइट्रेट पूरे देशभर में सबसे ज़्यादा पाया जाने वाला प्रदूषक है, लगभग 20% सैम्पलस में इसकी मात्रा अधिक पाई गई।

इसके बाद फ्लोराइड देशभर के 8.05% सैम्पलस में सुरक्षित सीमा से अधिक पाया गया। इसमें राजस्थान पहले नंबर पर रहा, पर इस प्रदूषण के पीछे मुख्य रूप से प्राकृतिक कारण ही हैं।

देशभर में प्री-मानसून के दौरान 6.71% और पोस्ट-मानसून में 7.91% भूजल नमूनों में यूरेनियम सुरक्षित सीमा (30 ppb) से अधिक पाया गया। इसका स्तर सबसे अधिक पंजाब में पाया गया, इसके बाद हरियाणा और दिल्ली रहे। इससे यह पता चलता है कि अनट्रीटेड वाटर ग्राउंडवाटर में मिल रहा है और इसके लिए तुरंत उपचार करने चाहिएं।

सूखे क्षेत्रों जैसे राजस्थान और दिल्ली में लवणता की अधिकता पाई गई जो कि खेती की दृष्टिसे चिंता जनक है।

अच्छी बात यह रही कि ज्यादातर जगहों पर भूजल सिंचाई के लिए काफी अच्छा पाया गया, 94% से अधिक सैंपल बहुत अच्छी श्रेणी में रखे गए।

Lead प्रदूषण के मामले में दिल्ली सबसे आगे रहा, यहां 9% से ज्यादा सैंपल्स में सीसे की मात्रा अधिक पाई गई।

वहीं कुछ  स्थानों पर पानी में दूसरी ज़हरीली धातुएँ भी मिली हैं—जैसे गंगा और ब्रह्मपुत्र के आसपास के इलाकों में आर्सेनिक, और असम, कर्नाटक, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मैंगनीज़ पाया गया है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट साफ़ दिखाती है कि भारत का भूजल इन्हीं सब ख़तरनाक रसायनों से दूषित होता जा रहा है, और इसके निवारण के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को नए और सख़्त कदम उठाने होंगे।

 

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