भारत का अंतरिक्ष सफर अब सिर्फ रॉकेट और उपग्रहों तक सीमित नहीं है। ISRO अब एक नई सोच पर काम कर रहा है— अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग, जिसे अंतरिक्ष में एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) कहा जा सकता है।
अंतरिक्ष विभाग (DoS) के मुताबिक, ISRO एक नए अध्ययन पर काम कर रहा है, जिससे अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपग्रहों पर ही छोटे डाटा प्रोसेसिंग सेंटर बनाये जा सके।
फिलहाल, उपग्रह अंतरिक्ष से तस्वीरें, सिग्नल और जानकारी को इकट्ठा करते हैं, और सारा डेटा धरती पर भेजते हैं। इसके बाद ग्राउंड स्टेशनों पर उस डेटा का विश्लेषण किया जाता है। ये तरीका काम तो करता है, लेकिन इसमें काफी समय लगता है और डेटा भेजने की क्षमता सीमित होती है।
इसी समस्या का समाधान है, On-board data processing यानि डेटा को उपग्रह पर ही प्रोसेस करना और ज़रूरी जानकारी धरती पर भेजना। इससे समय कम लगेगा और सिस्टम ज़्यादा तेज़ होगा।
Department of space के मुताबिक प्रारंभिक मूल्यांकन से पता चलता है, कि अंतरिक्ष में एज कंप्यूटिंग सिस्टम संभव हो सकता है, हालांकि पूरी तरह से काम करने वाले डेटा सेंटर को बनाने में अभी काफी अध्ययन और समय लगेगा।
धरती के डेटा सेंटर बिजली ग्रिड से चलते हैं, और एयर कूलिंग से ठंडे रहते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में इसकी परिस्थिति अलग है। वहां बिजली सोलर पैनल से मिल सकती है, लेकिन कूलिंग के लिए विशिष्ट तकनीकों का विकास करना होगा। इसके अलावा in orbit उपकरणों को रेडिएशन, बदलते तापमान और छोटे उल्कापिंडों से भी सुरक्षित रखना पड़ेगा।
अगर इन चुनौतियों से निपटने के प्रबंध हो जाएं तो यह गति, सुरक्षा और कवरेज से संबंधित कई प्रमुख लाभ प्रदान करेगा। जैसे बाढ़, चक्रवात या भूकंप के समय, डेटा अंतरिक्ष में जल्दी प्रोसेस हो सकता है, जिससे धरती पर राहत कार्य बिना देरी के तुरंत शुरू किए जा सकते हैं।
फिलहाल, यह विचार शुरुआती दौर में है, लेकिन यह अंतरिक्ष में भविष्य के मिशनों के लिए एक मज़बूत नींव रख सकता है।

