नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) महत्वाकांक्षी नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार यानि निसार मिशन 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा से जियोसिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल-एमके II के ज़रिए भारतीय समयानुसार शाम 5:40 बजे लॉन्च किया गया। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस लॉन्च का लाइव प्रसारण किया।
लगभग 10 वर्षों की अवधि में विकसित, 1.5 बिलियन डॉलर का यह मिशन दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सबसे महंगे मिशनों में से एक है। निसार मिशन का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिका और भारतीय विज्ञान समुदायों के साझा हितों के क्षेत्रों में बर्फ विरूपण यानि Ice Deformation, भूमि पारिस्थितिक तंत्र और समुद्री क्षेत्रों का अध्ययन करना है।
लॉन्च के बाद यह मिशन अंतरिक्ष यान प्रणालियों की जाँच, बूम और रडार एंटीना की तैनाती और रडार उपकरणों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए 90-दिवसीय कमीशनिंग चरण में प्रवेश करेगा। यह कमीशनिंग चरण उपग्रह को उसके वैज्ञानिक संचालन यानि science operation चरण के लिए महत्वपूर्ण है। नासा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मिशन एल-बैंड रडार के साथ कम से कम तीन वर्ष तक वैज्ञानिक संचालन करेगा, जबकि इसरो को एस-बैंड रडार के साथ पांच वर्ष तक संचालन की आवश्यकता है।

