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नई कैटेलिटिक तकनीक से अमोनिया उत्पादन होगा सतत और आसान

 

Sunlight-Activated Nanoparticles Enable Sustainable Ammonia Synthesis

अमोनिया एक ऐसा केमिकल कंपाउंड है, जिसका इस्तेमाल खेती से लेकर कई औद्योगिक इकाइयों में किया जाता है। इस रंगहीन केमिकल कंपाउंड को बनाने के लिए फ़िलहाल, हैबर-बॉश (Haber-Bosch) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें उच्च तापमान और उच्च दबाव की ज़रूरत पड़ती है। इससे ऊर्जा की खपत तो ज्यादा होती ही है, साथ ही वैश्विक स्तर पर, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 3% का इज़ाफ़ा भी होता है।

लेकिन अब स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, बोस्टन कॉलेज और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने ऐसे नए कैटेलिस्ट (Catalysts) या उत्प्रेरक विकसित किए हैं, जो सामान्य तापमान और वायुमंडलीय दबाव में ही, सूर्य की रोशनी से अमोनिया के संश्लेषण को सक्षम कर सकते हैं।

Metal nanoparticles से बने यह उत्प्रेरक प्रकाश को बहुत अच्छी तरह से पकड़ते हैं, और रासायनिक प्रतिक्रियाओं को बदल सकते हैं, जिससे अमोनिया बनाने का नया और कम ऊर्जा वाला तरीका मिलता है। वैज्ञानिकों ने पाया है, कि (AuRu) गोल्ड और रूथेनियम से बने बाइमेटैलिक नॅनोपार्टिकल्स सामान्य तापमान और दबाव पर ही, सूर्य की रोशनी से अमोनिया बना सकते हैं।

Nature Energy में छपे अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मिश्रण वाले AuRu मिश्र धातु बनाए और प्रति घंटे, प्रति ग्राम उत्प्रेरक के लिए, लगभग 60 माइक्रो-मोल अमोनिया उत्पादन दर हासिल की।

दिलचस्प बात यह है कि अमोनिया बनाने की यह प्रक्रिया प्रकृति में होने वाली जैविक प्रक्रिया जैसी ही है। शोधकर्ताओं के अनुसार भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े कारखानों के साथ-साथ छोटे प्लांट्स में भी किया जा सकता है। इससे अमोनिया और उससे बनने वाले उत्पाद कम ऊर्जा में और ज़्यादा साफ़ तरीके से बनाए जा सकेंगे।

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