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ग्लोबल बायो-इंडिया- 2023″ की वेबसाइट हुई लॉन्च

4 नवंबर, 2023 को आयोजित एक कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी पर एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “ग्लोबल बायो-इंडिया- 2023” की वेबसाइट लॉन्च करते हुए कहा, यह सम्‍मेलन 4 से 6 दिसंबर, 2023 तक प्रगति मैदान में आयोजित किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी बायोइकोनॉमी ने पिछले 9 वर्षों में वर्ष-दर-वर्ष दहाई अंक की विकास दर देखी है। उन्होंने कहा कि भारत को अब दुनिया के शीर्ष 12 जैव प्रौद्योगिकी गंतव्‍य स्थलों में मूल्‍यांकित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “वर्ष 2014 में, भारत की जैव-अर्थव्यवस्था लगभग 10 बिलियन डॉलर थी, आज यह 80 बिलियन डॉलर है। केवल 8/9 वर्षों में यह 8 गुना बढ़ गया है और हम वर्ष 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर होने की आशा करते हैं”।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आने वाले समय में बायोइकोनॉमी आजीविका का एक वृहद लाभकारी स्रोत बनने जा रही है।

उन्होंने कहा, “भारत में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र पिछले तीन दशकों में विकसित हुआ है और इसने स्वास्थ्य, चिकित्सा, कृषि, उद्योग और जैव-सूचना विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है”।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बायोटेक स्टार्टअप भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए अत्‍यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, “बायोटेक स्टार्टअप पिछले 8 वर्षों में 100 गुना बढ़ गए हैं, जो 2014 में 52 स्टार्टअप से बढ़कर वर्तमान में 6,300 से अधिक हो गए हैं। व्यवहारिक तकनीकी समाधान प्रदान करने की आकांक्षाओं के साथ भारत में प्रति दिन 3 बायोटेक स्टार्ट-अप शामिल हो रहे हैं”।


डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी भविष्य की तकनीक है।

उन्होंने कहा, “भारत के पास जैव संसाधनों की एक विशाल संपदा है, एक असंतृप्त संसाधन जिसका उपयोग किया जाना बाकी है और विशेष रूप से विशाल जैव विविधता एवं हिमालय में अद्वितीय जैव संसाधनों के कारण जैव प्रौद्योगिकी में एक लाभ है। फिर 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा है और पिछले साल हमने समुद्रयान लॉन्च किया था जो समुद्र के नीचे जैव विविधता की खोज करने वाला है”।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, बायोटेक्नोलॉजी स्टार्टअप जीव विज्ञान और विनिर्माण के नए शोध को मिलाकर एक अलग शैली है, जैसे कि जीवित प्रणालियों का प्रसंस्करण जिसमें सूक्ष्म जीव, स्व-संस्कृतियां आदि शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “जैव प्रौद्योगिकी आपको एक परिवेश, एक ऐसा वातावरण प्रदान करती है जो स्वच्छ, हरा-भरा और आपके जीवन के लिए अधिक अनुकूल होगा, फिर आपकी हिस्सेदारी इससे जुड़ जाती है। और जैसे-जैसे समय बीतता है, यह आजीविका के आकर्षक स्रोत भी पैदा करता है, साथ ही पेट्रोकेमिकल-आधारित विनिर्माण जैसे जैव-आधारित उत्पाद जैसे खाद्य योजक, बायोइंजीनियरिंग संबंध, पशु चारा उत्पाद के विकल्प भी पैदा करता है”।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज 3,000 से अधिक एग्रीटेक स्टार्टअप हैं और अरोमा मिशन और लैवेंडर की खेती जैसे क्षेत्रों में बहुत सफल हैं।

उन्होंने कहा, “लगभग 4,000 लोग लैवेंडर की खेती कर रहे हैं और लाखों रुपये कमा रहे हैं, उनमें से कुछ के पास उच्च शैक्षिक योग्यता नहीं है, लेकिन वे बहुत नवोन्मेषक हैं।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग उन्नत जैव ईंधन और ‘अपशिष्ट से ऊर्जा’ प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास नवाचारों का समर्थन कर रहा है।

“भविष्य में, कूड़ा-कचरा घटकर शून्य हो जाएगा। सब कुछ पुन: चक्रित किया जाएगा,” यह कहते हुए उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (सीएसआईआर-आईआईपी) द्वारा विकसित रीसाइक्लिंग तकनीक से बनाई गई एक वैन का उल्‍लेख किया जो अपशिष्ट खाना पकाने के तेल को इकट्ठा करती है और इसे जैव ईंधन में परिवर्तित करती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी युवाओं के बीच एक ट्रेंडिंग रोजगार विकल्प के रूप में उभर कर आई है।

उन्होंने कहा “सिंथेटिक टेक्नोलॉजी, जीनोम एडिटिंग, माइक्रोबियल बायोरिसोर्सेज और मेटाबॉलिक इंजीनियरिंग जैसे टूल्स के बारे में अब अक्सर चर्चा की जाती है।”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन का उल्‍लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत की वैक्सीन रणनीति, मिशन सुरक्षा, वर्तमान के साथ-साथ संभावित भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए फार्मा, उद्योग और शिक्षा जगत को एक साझेदारी में एक साथ लेकर आती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 और डीएनए वैक्सीन की दोहरी सफलता की कहानियों ने भारत की वैज्ञानिक बिरादरी को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर दिया है, जहां विकसित देश भी हमसे सूत्र ले रहे हैं।

उन्होंने कहा, “पहले भारत शायद ही किसी निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए जाना जाता था, लेकिन आज भारत को दुनिया के टीकाकरण हब के रूप में पहचाना जाता है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने उद्यमिता और एक संपन्न उद्योग के लिए वातावरण तैयार किया है।

उन्होंने कहा “हमारे पास सब कुछ था, लेकिन हम संभवतः एक सक्षम वातावरण के होने की प्रतीक्षा कर रहे थे और वह सक्षम माहौल नीति-निर्माताओं के स्तर से, राजनीतिक नेतृत्व के स्तर से आना था और यह प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद हुआ”।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया है कि समन्‍वयविहीन वातावरण में काम करने का युग खत्म हो गया है और हमें अपने अप्रयुक्त संसाधनों की विशाल क्षमता का स‍दुपयोग करने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा परिकल्पित अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देगा और अगले 5 वर्षों में भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं विकास के प्रणेता के रूप में स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा, ”हमें वैश्विक मानकों, वैश्विक रणनीतियों और वैश्विक दृष्टिकोण को पूरा करना होगा।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एनआरएफ के पास विशाल गैर-सरकारी संसाधन होंगे, पांच वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये के एनआरएफ बजट का लगभग 70 प्रतिशत गैर-सरकारी स्रोतों से आने की परिकल्पना की गई है।

उन्होंने कहा, “अनुसंधान एनआरएफ वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार एवं मनुष्‍य-जाति-संबंद्धी विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के ज्ञान को संयोजित करेगा।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शुरुआती स्‍तर से ही उद्योग जगत से जुड़ाव रहेगा, जिससे नवाचार के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा।

उन्होंने कहा, “यह केंद्र/राज्य सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप, निवेशकों, परोपकारी संगठनों सहित सभी हितधारकों का एक सामूहिक प्रयास होगा।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगामी 25 वर्षों में “अमृत काल” के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए व्यवसायों के सभी क्षेत्रों के बीच व्यापक तालमेल का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक उक्ति: “संपूर्ण विज्ञान, साथ ही संपूर्ण सरकार, और संपूर्ण राष्ट्र” है।

अपने संबोधन में, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव, डॉ. राजेश गोखले ने कहा, डीबीटी और उसके पीएसयू, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी), जैविक के निर्माण का समर्थन कर रहे हैं और स्टार्टअप नवाचार इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रहे है और विकसित कर रहे हैं।

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