fbpx
News Research

उपग्रह विघटन समझने में सहायक होगा ESA का DRACO मिशन

 

हमारी धरती के चारों ओर आज हज़ारों उपग्रह लगातार घूम रहे हैं, जिनसे दुनिया भर में संचार, मौसम की जानकारी, और सटीक नेविगेशन समेत कई सुविधाएं हमें प्राप्त होती हैं।

लेकिन उपग्रह अपनी कार्य-सीमा के अनुसार ही काम करते हैं। मिशन पूरा होने के बाद ज़्यादातर उपग्रह धरती के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते हुए उल्का पिंडों की तरह जल कर नष्ट हो जाते हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 70 वर्षों में, करीब 10,000 उपग्रह और रॉकेट इसी तरह पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आ चुके हैं।

परंतु वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए कि इन उपग्रहों के साथ आखिरी पलों में क्या होता है? ये किस प्रकार नष्ट होते हैं? तापमान और दबाव कितना होता है? क्या उपग्रह पूरी तरह से जल जाता है, या उसके कुछ टुकड़े बचते हैं?

उपग्रह के विघटन से जुड़ा ऐसा ही डेटा इकट्ठा करने के लिए European Space Agency  एक मिशन तैयार कर रही है, जिसका नाम है- ड्रेको (DRACO-Destructive Reentry Assessment Container Object)

ESA की योजना के अनुसार, वॉशिंग मशीन के आकार के इस उपग्रह को 2027 में पृथ्वी के वायुमंडल में जानबूझकर गिराएगा जाएगा। इसके अंदर एक मज़बूत कैप्सूल लगा होगा, ताकि जब ड्रेको वातावरण में घुसकर टूटे या जले, तब यह कैप्सूल अंदर से तापमान, दबाव और टूटने की प्रक्रिया को रिकॉर्ड करे और सारा डेटा वैज्ञानिकों तक पहुँचे।

इस अनूठे डेटा का उपयोग करके वैज्ञानिक ऐसे उपग्रह बना सकेंगे जो काम पूरा होने के बाद ख़ुद ही नष्ट हो जाएं, ताकि अंतरिक्ष में मलबे के निर्माण पर काबू पाया जा सके।

तो हम कह सकते हैं कि ड्रेको खुद नष्ट होकर हम तक यह जानकारी पहुंचाएगा कि भविष्य के मिशनों के लिए पृथ्वी की बहुमूल्य कक्षाओं को साफ़ और सुरक्षित कैसे रखा जाए।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like