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हार्ट अटैक आज दुनिया भर में एक बड़ी समस्या और मौत की वजह बना हुआ है, क्योंकि एक बार हार्ट अटैक आने के बाद दिल की मांसपेशियां पहले जैसी नहीं रह पातीं।
आमतौर पर डॉक्टर ब्लॉकेज खोलकर खून के फ़्लो को तो ठीक कर देते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है की हार्ट अटैक के दौरान जो दिल की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं, फिर ये कोशिकाएं पहले की तरह नहीं बन पातीं।
Columbia University के Engineering विभाग के शोधकर्ताओं ने RNA यानी Ribonucleic acid पर आधारित एक नई तकनीक पर काम शुरू किया है, जिससे शरीर खुद दवा बना सकता है।
इस तकनीक में RNA के जरिए शरीर के दूसरे ऊतकों को एक जैविक संकेत दिया जाता है, जिससे कि वे Atrial Natriuretic Peptide (ANP) नाम का एक healing molecule बना पाएँ।
ये Molecule खून के जरिए दिल तक पहुँच कर ऐक्टिव हो जाते हैं, इससे दिल की सूजन ठीक हो जाती है और काम करने की क्षमता और बेहतर हो सकती है।
इस तकनीक की खास बात ये है कि इसमें ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें सिर्फ एक इंजेक्शन देकर शरीर की मांसपेशियों द्वारा दिल की मांसपेशियों तक संकेत भेजा जाता है। इस इंजेक्शन को हाथ की मांसपेशियों में लगाया जा सकता है।
जब शोधकर्ताओं ने यही इंजेक्शन जानवरों को लगाया, तो उन्होंने पाया कि सिर्फ एक इंजेक्शन से ही उनके दिल की हालत में कई हफ्तों तक सुधार बना रहा।
शोधकर्ताओं का कहना है कि RNA कोशिकाओं को मैसेज देता है, इसलिए इसका इलाज शरीर के अंदर ही दवा को तैयार करने जैसा काम करता है। शोधकर्ताओं का मानना है अगर यही तरीका इंसानों में भी सफल हुआ, तो आने वाले समय में हार्ट अटैक का इलाज सस्ता और असरदार हो सकेगा।

