
समुद्रों और झीलों का पानी पहले नीला और साफ हुआ करता था। जिसमें कई तरह के जीव आराम से रहा करते थे। लेकिन अब दुनिया के कई हिस्सों में पानी का रंग लाल या भूरा दिखने लगा है, जिसका कारण है प्रदूषित पानी में उगने वाला शैवाल यानि algae जिसे वैज्ञानिक “Red Tide” भी कहते हैं।
दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया का एक क्षेत्र नौ महीने से ज़हरीले शैवाल का सामना कर रहा है। हज़ारों मील तक फैला हुआ यह एरिया समुद्री जीवों की हज़ारों प्रजातियों की मौत का कारण बन चुका है। इस तरह के हानिकारक algal blooms (HABs) ऐसे ज़हरीले पदार्थ उत्पन्न करते हैं, जिनके कारण नगरपालिकाएं समुद्र तटों और झीलों को बंद करने के लिए मजबूर हो सकती हैं।
अब तक वैज्ञानिकों को लगता था, कि इन शैवालों की बढ़ती संख्या का कारण खेतों से बहकर आने वाला गंदा पानी और कचरा है, जिसमें ज़्यादा पोषक तत्व होते हैं।
पर हाल ही में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो (UC San Diego) के नए अध्ययन से पता चला कि पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक भी इस समस्या को बढ़ा रहा है।
दरअसल रोज़ाना इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से निकले माइक्रोप्लास्टिक्स उन जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं, जो शैवाल को खाते हैं और उसे फैलने से रोकते हैं। जब ये जीव मरने लगते हैं, तब शैवाल को रोकने के लिए कोई नहीं बचता। और तभी शैवाल तेज़ी से बढ़ने लगते हैं, और पानी को ज़हरीला बना देते हैं।
शोध में यह भी पाया गया कि जैव-आधारित प्लास्टिक का असर इन जीवों पर काफी कम होता है।
वैज्ञानिकों का कहना है, की अगर हम सामान्य प्लास्टिक की जगह जल्दी गलने वाले और पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक अपनाएँ, तो Aquatic Ecosystem को होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है।

