नासा जैसी अंतरिक्ष एजेंसियां चांद पर मानव बस्तियां बनाने का सपना देख रही हैं। और इस सपने को सफल बनाने के लिए सबसे ज़रूरी होगा चांद पर खेती करना, ताकि अंतरिक्ष यात्री खुद अपना खाना उगा सकें।
इसलिए ये शोध किए जा रहे हैं, कि कौन सी फसल आसानी से चांद पर उगाई जा सकती है। ऐसे ही एक अध्ययन से पता चला कि सबका मनपसंद आलू चांद पर भी उगाया जा सकता है।
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने सबसे पहले चंद्रमा जैसी मिट्टी बनाई, जिसे रेगोलिथ कहा जाता है। परंतु रिगोलिथ में पौधों के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स नहीं होते, इसलिए वैज्ञानिकों ने इस मिट्टी में 5% वर्मी कम्पोस्ट खाद को मिलाकर देखा।
और वैज्ञानिकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब इस तैयार मिट्टी में आलू के पौधे आसानी से उग गए और लगभग दो महीने तक जीवित रहे। तभी पता चला कि इसमें खाने वाला कंद भी विकसित हो सकता है, और इसमें पोषण भी पूरा पाया गया।
हालांकि इन पौधों की डीएनए एनालिसिस से यह भी पता चला कि कुछ पौधे तनाव में रहे, यानी वे पूरी तरह से सहज नहीं थे। इसके अलावा, आलू में तांबा और जिंक जैसी धातुओं की मात्रा ज़्यादा पाई गई, जो कि इंसानों के लिए हानिकारक हो सकती है।
और हक़ीक़त यह भी है, कि यह शोध पूरी तरह से चांद जैसी परिस्थितियों में नहीं किया गया। यानी इसमें तेज़ रेडिएशन, तापमान का उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियां शामिल नहीं थीं। इसलिए कह सकते हैं कि चांद पर खेती करना मुमकिन तो है, पर आसान नहीं।
परंतु वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी है। आलू के साथ-साथ वे जगह-जगह आसानी से उग जाने वाली दूसरी फसलों पर भी शोध कर रहे हैं। इसके साथ-साथ चांद पर फसले उगाने के लिए बेहतर तरीकों पर भी शोध किया जा रहा है।

