
हिमालय की ऊँची पहाड़ियों में एक बड़ा लेकिन कम दिखाई देने वाला ख़तरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड की अलकनंदा घाटी के ऊपर कुछ ग्लेशियर खड़ी चट्टानों पर लटके हुए हैं, जिन्हें Hanging Glaciers कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने ऐसे ही करीब 219 ग्लेशियरों की पहचान की है।
स्टडी के अनुसार, ये ग्लेशियर 4,000 से 6,700 मीटर की ऊंचाई पर लगभग 33 डिग्री की ढलान पर बने हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है की इन ग्लेशियरों का पूरा क्षेत्रफल 71.7 वर्ग किलोमीटर है, और इनमें 2.4 घन किलोमीटर बर्फ़ मौजूद है।
इसमें से लगभग 0.7 घन किलोमीटर का हिस्सा सबसे ज्यादा अस्थिर है। लगभग 30% ग्लेशियर बद्रीनाथ और माणा इलाके में हैं, जबकि विष्णुगंगा क्षेत्र सबसे ज्यादा जोख़िम वाला है।
अगर ये ग्लेशियर टूटते हैं, तो तेज़ी से बर्फ नीचे गिरेगी। जिससे बद्रीनाथ और माणा जैसे इलाकों को नुकसान पहुँच सकता है। हज़ारों लोगों के साथ Trekking route और प्रमुख तीर्थ मार्ग भी प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, नदियों का रास्ता रुकने से अचानक बाढ़ का ख़तरा भी बढ़ जाएगा।
याद रहे कि पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र का तापमान तेज़ी से बढ़ा है, जिससे ग्लेशियर और ज्यादा अस्थिर हो रहे हैं। इसलिए शोधकर्ताओं के अनुसार उच्च जोखिम वाले ग्लेशियरों की पहचान करने के लिए उपग्रह निगरानी, ज़मीनी सेंसर और हिमस्खलन मॉडलिंग के संयोजन की तो ज़रूरत है ही, साथ ही बेहतर भूमि उपयोग की योजना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण को प्रतिबंधित करना, आपदा तैयारियों को मज़बूत करना और स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना जोख़िम को काफी हद तक कम कर सकता है। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु, IIT भुवनेश्वर और DGRE चंडीगढ़ के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन Natural Hazards में प्रकाशित किया गया है।

